पंजाब सरकार ने जीएसटी से अलग हुये सामनों की कीमतों की समीक्षा कराने कि की मांग

नई दिल्ली। विशेष संवाददाता
पंजाब ने जीएसटी के तहत एग्जेम्प्शंस की सीमा में बदलाव करते हुए इसके दायरे से बाहर रखी जाने वाली चीजों की व्यापक स्तर पर समीक्षा करने की बात कही है। राज्य के वित्तमंत्री मनप्रीत बादल ने बिजली, रियल एस्टेट और पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के तहत लाने की मांग भी की है। बादल ने कहा, हमें टैक्स रेट्स और एग्जेम्प्शंस पर भी दुबारा विचार करना पड़ सकता है ताकि आगे बढ़ने के लिए एक लॉन्ग टर्म ब्लू प्रिंट बनाया जा सके। शुरुआत में चावल, गेहूं, अनाज जैसी जरूरी चीजों पर ही जीएसटी नहीं लगाने का निर्णय किया गया था, लेकिन बाद में कई राज्यों ने अपने यहां बड़े स्तर पर उपभोग वाली चीजों को इसमें शामिल करने की मांग की, जिससे यह लिस्ट बड़ी हो गई। जीएसटी से बाहर रखे गए आइटम्स का रिव्यू किए जाने पर जोर देते हुए बादल ने कहा, दुनियाभर में अधिकतर प्रगतिशील सरकारें एग्जेम्प्शन के लिए ऊंचा थ्रेशोल्ड रखती हैं और एग्जेम्प्शन की लिस्ट छोटी होती है। हालांकि हमने कम थ्रेशोल्ड के साथ शुरुआत की और बाद में एग्जेम्प्शन वाली लिस्ट बड़ी होती गई।
वित्तमंत्री अरुण जेटली को 27 दिसंबर 2018 को लिख गए लेटर में बादल ने कहा है कि गुड्स एंड सर्विसेज के लिए एक कॉमन कंपोजिट लिमिट होनी चाहिए।हालिया विधानसभा चुनावों के बाद जीएसटी काउंसिल की बैठक हुई थी। इन चुनावों में बीजेपी के हाथ से तीन राज्य निकल गए थे। काउंसिल की मीटिंग में कांग्रेस के कुछ मंत्रियों ने कुछ उत्पादों पर टैक्स रेट 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने पर सवाल उठाया था, जिस लेकर कुछ सियासी तकरार हुई थी। बीजेपी शासित राज्यों के प्रतिनिधियों ने मांग रखी थी कि उनकी बात काउंसिल की मीटिंग के ब्योरे में दर्ज की जाए क्योंकि कांग्रेस पार्टी बाहर तो सभी वस्तुओं पर 18 प्रतिशत की दर से जीएसटी लगाने की बात करती है।
वहीं कांग्रेस शासित राज्यों के प्रतिनिधियों ने बताया कि पीएम नरेंद्र मोदी ने काउंसिल की मीटिंग से पहले ही 28 प्रतिशत वाले स्लैब से कई आइटम्स हटाने के संबंध में घोषणा कर दी थी जबकि जीएसटी पर निर्णय करने की शीर्ष संस्था काउंसिल है। पंजाब ने आगामी आम चुनाव को देखते हुए जीएसटी कानून की समीक्षा समिति को नए सिरे से बनाने की मांग भी की है। बादल ने कहा, हमें अचानक कोई कदम उठाने के लोभ से बचना चाहिए और अपने जीएसटी को विश्वस्तरीय बनाने की दिशा में काम करना चाहिए।

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