Mon. May 17th, 2021

नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी लगातार तीसरी बार चुनावी जीत दर्ज करने में कामयाब रही है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भले ही नंदीग्राम सीट पर शुभेंदु अधिकारी के मुकाबले पराजित हो गई हों, लेकिन बंगाल के सियासी रण में उन्होंने 213 सीटें हासिल कर भाजपा के सत्ता में आने के अरमानों पर पानी फेर दिया।
इतना ही नहीं ममता बनर्जी की लहर में तमाम दिग्गज नेता चुनाव में धराशायी हो गए, जिन्होंने टीएमसी का साथ छोड़कर भाजपा का दामन थामा था। पश्चिम बंगाल में सन 2016 के चुनाव के बाद से टीएमसी नेताओं का पार्टी छोड़ने और भाजपा का दामन थामने का जो सिलसिला शुरू हुआ था, वह 2021 विधानसभा चुनाव में भी जारी रहा। 2019 में भाजपा को इसका सियासी फायदा मिला था, लेकिन विधानसभा चुनाव में जनता ने दलबदलू नेताओं को पूरी तरह से नकार दिया। पिछले दो सालों में टीएमसी के करीब एक दर्जन से ज्यादा विधायकों सहित 30 नेताओं ने भाजपा में एंट्री ली थी।
भाजपा ने इनमें से अनेक नेताओं को चुनाव मैदान में उतारा था, जिनमें 8 विधायकों सहित 16 को पराजय का मुंह देखना पड़ा है। हालांकि, टीएमसी से आए आधा दर्जन नेताओं को विधानसभा चुनाव में जीत मिली है। भाजपा ने अपने चार सांसदों को विधानसभा चुनाव में उतारा था, जिनमें तीन को पराजय का सामना करना पड़ा है। महज एक सांसद को ही जीत मिल सकी है।
बंगाल की सियासी जंग फतह करने के लिए भाजपा ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। भाजपा ने अपने चार सांसदों को भी चुनावी मैदान में उतार दिया था, इसमें से लॉकेट चटर्जी चुंचुरा सीट से, स्वपन दास गुप्ता तारकेश्वर सीट से और बाबुल सुप्रियो, टॉलीगंज से चुनाव हार गए हैं। जबकि, निशीथ प्रामाणिक को दिनहटा सीट से जीत मिली है। ऐसे में देखना है कि निशीथ सांसद रहते हैं या फिर विधानसभा में आते हैं।
टीएमसी छोड़कर भाजपा से चुनाव लड़ने वाले राजीव बनर्जी को दोमजुर विधानसभा सीट पर 43 हजार वोटों से टीएमसी प्रत्याशी के हाथों मात खानी पड़ी है। टीएमसी छोड़कर भाजपा से चुनाव लड़ने वाली वैशाली डालमिया को बाली सीट पर 6 हजार वोटों से शिकस्त मिली। सिंगूर सीट पर रवींद्रनाथ भट्टाचार्य को 25 हजार वोटों से हार मिली है, यह भी टीएमसी छोड़कर भाजपा से चुनावी मैदान में उतरे थे।
कलना सीट पर विश्वजीत कुंडू को 8 हजार वोटों से हार मिली है और यह भी टीएमसी छोड़कर भाजपा से चुनावी मैदान में किस्मत आजमा रहे थे। डायमंड हॉर्बर सीट पर दीप हल्दर को 23 हजार वोटों से हार मिली है, उन्होंने टीएमसी छोड़कर भाजपा से चुनाव लड़ा था। शीलभद्र दत्ता को टीएमसी छोड़कर भाजपा से चुनाव लड़ना मंहगा पड़ा, उन्हें खड़दह सीट पर 28 हजार वोटों से हार मिली है। ऐसे ही अरिंदम भट्टाचार्य को भी टीएमसी छोड़कर भाजपा से उतरने पर हार का मुंह देखना पड़ा है, उन्हें जगतदल सीट पर 19 हजार मतों से हार का सामना करना पड़ा है।
विद्यानागर सीट पर भाजपा की तरफ से उतरे सब्यसागी गुप्ता को 8 हजार मतों से पराजय का सामना करना पड़ा है। उन्होंने चुनाव से ठीक पहले टीएमसी छोड़कर भाजपा का दामन थामा था। क्रिकेटर अशोक डिंडा, अभिनेत्री पायल सरकार, अभिनेता यश दासगुप्ता और पूर्व आईपीएस भारती घोष सहित कई दिग्गज चुनाव हार गए हैं।
टीएमसी छोड़कर भाजपा से चुनाव लड़ने वाले शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम सीट पर ममता बनर्जी को मात दे दी है। मुकुल रॉय ने कृष्णानगर उत्तर सीट से जीत दर्ज की है। पार्थ चटर्जी को रानाघाट उत्तर पश्चिम सीट से जीत मिली है। मिहिर गोस्वामी नाटाबाड़ी विधानसभा सीट से जीते हैं। पंडाबेश्वर सीट से भाजपा उम्मीदवार जितेंद्र तिवारी ने जीत दर्ज की है। इसके अलावा विश्वजीत दास बगदा सीट से जीत दर्ज की है। ये सभी नेता टीएमसी छोड़कर भाजपा में आए थे।

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