Mon. May 17th, 2021

नई दिल्ली। बंगाल के चुनाव नतीजे आ गए हैं। 213 सीटें जीतकर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने बंगाल की सत्ता में लगातार तीसरी बार वापसी की है। टीएमसी ने प्रतिद्वंदी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की तुलना में करीब 10 फीसदी अधिक वोट प्राप्त किए। टीएमसी को करीब 48 और बीजेपी को करीब 38 फीसदी वोट प्राप्त हुए। इस बीच चौंकाने वाला नतीजा ये रहा कि पिछले चुनाव में 44 सीटों के साथ दूसरी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी कांग्रेस का खाता भी नहीं खुला। कांग्रेस को 2.93 फीसदी वोट मिले लेकिन सीटें एक भी नहीं जीत सकी। यही हाल लेफ्ट फ्रंट का भी रहा, उसने कांग्रेस और पीरजादा अब्बास सिद्दीकी की पार्टी इंडियन सेक्युलर फ्रंट के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ा। वाम मोर्चा-कांग्रेस गठबंधन शून्य सीटों पर सिमट गया। सूबे की सत्ता में लंबे समय तक काबिज रहे ये दोनों दल साथ भी आए लेकिन बंगाल की जनता ने इन्हें खारिज कर दिया। बंगाल में अब तक अपनी सियासी जमीन तलाशती रही बीजेपी को 77 सीटों पर जीत मिली। राष्ट्रीय सेक्युलर मजलिस पार्टी से एक और एक निर्दलीय उम्मीदवार भी चुनाव जीत विधानसभा पहुंचने में सफल रहा लेकिन कांग्रेस और वाम दलों का एक भी उम्मीदवार चुनाव नहीं जीत सका।
आजादी के बाद ऐसा पहली बार हुआ है, जब बंगाल की विधानसभा में कांग्रेस और लेफ्ट फ्रंट का एक भी विधायक नहीं होगा। गौरतलब है कि पिछले चुनाव में कांग्रेस ने 44 और माकपा ने 26 विधानसभा सीटों पर जीत हासिल की थी। साल 2011 के चुनाव में जब वाम दलों के लंबे शासनकाल का अंत हुआ था, तब भी कांग्रेस 42 सीटें जीतने में सफल रही थी। साल 2011 के चुनाव में वाम मोर्चा भी 40 सीटें जीत तीसरे स्थान पर रहा था। 1977 से 2006 के चुनाव तक जब वाम मोर्चा की सरकार सत्ता में वापसी करती रही, तब भी कांग्रेस विधानसभा में शून्य पर नहीं पहुंची थी। कांग्रेस ने साल 2006 में 21, 2001 में 26, 1996 में 82, 1991 में 43, 1987 में 40, 1982 में 49 और 1977 के चुनाव में 20 विधानसभा सीटें जीती थीं।

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