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विशेष संवाददाता

चंडीगढ़। पूर्व क्रिकेटर और पंजाब के पूर्व कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू का नाता विवादों से बना रहता है। अब हरियाणा के स्थानीय नेता भी उनके खिलाफ हो गए है। हरियाणा कांग्रेस के कई बड़े नेता नवजोत सिंह सिद्धू से चुनाव में प्रचार नहीं कराना चाहते हैं। हरियाणा कांग्रेस के सूत्रों के मुताबिक नेता नवजोत सिंह सिद्धू को स्टार प्रचारकों की लिस्ट में नहीं चाहते हैं। प्रदेश के कई नेता लोकसभा चुनाव के दौरान रोहतक में सिद्धू की जनसभा में पाकिस्तान विरोधी नारे और सिद्धू पर एक महिला द्वारा चप्पल फेंके जाने से रोहतक लोकसभा सीट पर नुकसान की वजह माना रहे हैं।
कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने आलाकमान से कहा कि नवजोत सिंह सिद्धू की पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान से दोस्ती और पाक आर्मी चीफ जनरल बाजवा से गले मिलने की वजह से बनी राष्ट्र विरोधी इमेज का असर पड़ सकता है। राष्ट्रवाद के मुद्दे पर बुरी तरह से घिरे सिद्धू से किसी संभावित नुकसान से बचने के लिए हरियाणा कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता नहीं चाहते कि नवजोत सिंह सिद्धू से हरियाणा में चुनाव प्रचार करवाया जाए।
महाराष्ट्र की तरह हरियाणा विधानसभा के लिए हो रहे चुनाव में नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 4 अक्टूबर है। दोनों ही राज्यों में चुनाव प्रचार जोरों पर चल रहा है जहां पर 21 अक्टूबर को मतदान कराया जाएगा। इससे पहले पिछले महीने के अंत में वैष्णो देवी पहुंचे कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू के साथ धक्का-मुक्की की गई थी। शिवसेना ने सिद्धू के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया और जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने सवाल उठाए कि मां वैष्णो देवी में नवजोत सिंह सिद्धू को वीआईपी ट्रीटमेंट क्यों दिया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि सिद्धू पाकिस्तान के समर्थन में कई बयानबाजी कर चुके हैं।
खालिस्तानी उग्रवादी और आतंकी हाफिज सईद के करीबी गोपाल सिंह चावला ने सिद्धू के साथ अपनी एक तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट की थी। इसके बाद सिद्धू की पाकिस्तान यात्रा विवादों में आ गई। देश की राजनीति में इस पर भूचाल मच गया था और विपक्षी दलों ने कांग्रेस से सिद्धू की मुलाकात पर स्टैंड साफ करने को कहा।
मामला बढ़ने पर नवजोत सिद्धू ने कहा था कि उन्हें राहुल गांधी ने ही पाकिस्तान भेजा था। उन्होंने कहा, ‘मेरे कप्तान राहुल गांधी हैं, उन्होंने ही भेजा है हर जगह।’ बाद में यह विवाद इतना बढ़ा कि उनकी पार्टी के कई नेताओं ने पंजाब लोकसभा चुनाव में पार्टी के खराब प्रदर्शन का ठीकरा सिद्धू के माथे पर फोड़ा।
विवादों के बीच मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह से उनकी अनबन कुछ ज्यादा ही बढ़ गई और उन्हें पंजाब कैबिनेट से इस्तीफा देना पड़ा। छह जून को मंत्रिमंडल के पुनर्गठन में नवजोत सिंह सिद्धू से स्थानीय सरकार, पर्यटन और सांस्कृतिक मामलों का विभाग लेकर उन्हें बिजली और नए और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत मंत्रालय दे दिया गया था, जिसे स्वीकार करने से मना कर दिया। फिर वह एकांतवास में चले गए।

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