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विशेष प्रतिनिधि

नई दिल्ली । देश की राजधानी दिल्ली में विधानसभा चुनाव होने हैं और इससे पहले प्रदेश कांग्रेस की खींचतान सामने आ गई है। दिवंगत शीला दीक्षित के बेटे और पूर्व सांसद संदीप दीक्षित ने दिल्ली कांग्रेस प्रभारी पीसी चाको को एक पत्र लिखा है। संदीप इस पत्र को निजी बता रहे हैं, लेकिन खबरें है कि इसमें उन्होंने पीसी चाको पर गंभीर आरोप लगाए हैं और माफी की मांग की है। पीसी चाको को लिखा गया पत्र फिलहाल सामने नहीं आया है। लेकिन कहा जा रहा है कि उसमें संदीप ने चाको पर गंभीर आरोप लगाए हैं। लिखा गया है कि उनकी मां (शीला) की मौत के जिम्मेदार वही (चाको) हैं। संदीप ने कहा है कि चाको के मानसिक उत्पीड़न से उनकी मां का निधन हुआ। पत्र में संदीप ने कहा है कि अब चाको इसके लिए माफी मांगें या फिर कानूनी कार्रवाई के लिए तैयार रहें।
कयासों के बीच संदीप दीक्षित ने भी मान लिया है कि उन्होंने चाको को पत्र लिखा है। लेकिन वह इसे निजी पत्र बता रहे हैं। संदीप का कहना है कि पत्र निजी है और अगर चाको इसे सार्वजनिक कर रहे हैं तो यह उनका मामला है। संदीप ने यह भी कहा कि पत्र में नेशनल कांग्रेस को लेकर कोई बात नहीं है। बता दें कि शीला की मौत के बाद भी संदीप ने कहा था कि पार्टी में कुछ लोग ओछी हरकतें कर रहे हैं, जिसका नुकसान भी हुआ। लेटर पर मीडिया से बात करते हुए संदीप ने कहा, ‘पर्सनल लेटर है। इसका नेशनल कांग्रेस से कोई लेना-देना नहीं है। मेरा दिल्ली की कांग्रेस से कोई लेना-देना नहीं, मैं दिल्ली की राजनीति से 5 साल से बाहर हूं। दिल्ली में कहीं आता-जाता नहीं हूं। चाको को लिखा लेटर पर्सनल है। अगर वह उसे लीक करते हैं तो यह उन पर है। यह गलत है।’
शीला के निधन के बाद से प्रदेश अध्यक्ष का पद खाली पड़ा है। कांग्रेस में फिलहाल कोई दूसरा बड़ा चेहरा नहीं है। इसलिए शीला के काम को कैश करने के लिए संदीप को यह पद दिया जा सकता है। संदीप दीक्षित दो बार दिल्ली में सांसद रह चुके हैं। असल में विधानसभा चुनाव में कांग्रेस दिल्ली में इमोशनल कार्ड खेल सकती है। दिल्ली के लोग इस बात को मानते हैं कि अपने 15 साल के मुख्यमंत्रीकाल में शीला दीक्षित ने दिल्ली में विकास को जबर्दस्त गति दी थी। इसके अलावा हाल मई में हुए लोकसभा चुनाव में शीला के नेतृत्व में पार्टी के सात में पांच उम्मीदवार दूसरे नंबर पर आए थे, साथ ही पार्टी का वोट प्रतिशत 22.5 तक पहुंच गया, जबकि पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टी को मात्र 9.7 प्रतिशत ही वोट मिले थे। इसलिए संभावना है कि शीला के कामकाज को भुनाने के लिए पार्टी संदीप दीक्षित को अध्यक्ष बना सकती है।

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