Wed. Apr 14th, 2021

– तमिल वेशभूषा में पीएम मोदी ने जिनपिंग का किया स्वागत 

 विशेष संवाददाता 

नई दिल्ली । चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग अपने दो दिवसीय भारत दौरे पर पहुंच चुके हैं। वे पहले चेन्नई पहुंचे और वहां कुछ देर रुककर महाबलीपुरम (मामल्लापुरम) पहुंचे। यहां भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तमिल वेशभूषा में जिनपिंग का स्वागत किया। इस दौरान मोदी ने अंग्रेजी, तमिल और मेंडेरिन में ट्वीट किया- भारत में आपका स्वागत है, राष्ट्रपति जिनपिंग। दोनों नेताओं के बीच लगातार दो दिन कई दौर की वार्ता होगी। हालांकि, दोनों देशों के बीच कोई भी समझौता नहीं होगा।
पीएम मोदी ने मामल्लापुरम में जिनपिंग को अर्जुन तपस्या स्थली और तट मंदिर के दर्शन कराए और महत्व भी बताया। इसके बाद दोनों ने पंच रथ स्थल पर नारियल पानी पिया और अनौपचारिक बातचीत की शुरुआत की। महाबलीपुरम में सांस्कृतिक कार्यक्रम के बाद मोदी ने जिनपिंग को रात्रिभोज दिया। जिनपिंग को पारंपरिक दक्षिण भारतीय व्यंजन परोसे गए। इनमें अर्चु विट्टा सांभर, थक्काली रसम, कडालाई कोरमा और हलवा शामिल थे। पूर्ण कुंभम सांस्कृतिक नृत्य।
इससे पहले चेन्नई एयरपोर्ट पर उतरते ही जिनपिंग का पारंपरिक वेश-भूषा और वाद्ययंत्रों से भव्य स्वागत हुआ। उनके स्वागत में पूर्ण कुंभम सांस्कृतिक नृत्य की प्रस्तुति दी गई। एयरपोर्ट पर तमिलनाडु के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित ने जिनपिंग की अगवानी की। एशिया की होगी 21वीं सदी । चीनी मीडिया ने भारत से दोस्ती को अहम बताते हुए कहा कि दोनों देश मिलकर ही 21वीं सदी को एशिया का बना सकते हैं। 19वीं सदी यूरोप की थी, 20वीं सदी अमेरिका की और अब 21वीं सदी एशिया की होगी। यह चीन और भारत की आर्थिक प्रगति से ही संभव होगा।जिनपिंग के दो दिवसीय भारत दौरे के दौरान पाकिस्तान कराची पोर्ट के पास सोनमियानी परीक्षण रेंज में एक बड़ा मिसाइल टेस्ट करने वाला है। खुफिया एजेंसियों ने यह जानकारी दी है।
दोनों नेताओं के अलावा चीन के विदेश मंत्री वांग यी, भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल पर भी सभी की नजरें होंगी। डोभाल और वांग के बीच सितंबर में मुलाकात होनी थी। लेकिन, मुलाकात स्थगित गई थी। वहीं, भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर चीन मामलों के अच्छे जानकार के रूप में जाने जाते हैं और ऐसा माना जाता है कि दोनों देशों के बीच रिश्ते जब अच्छे नहीं थे, उस वक्त उन्होंने ही पीएम मोदी और जिनपिंग के बीच गैर-आधिकारिक बैठक की योजना बनाई थी। इसे उनके विदेश मंत्री बनने के बाद उनकी कौशल परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है।
मोदी ने चेन्नई पहुंचकर कहा कि इस मुलाकात से भारत और चीन के रिश्तों को मजबूती मिलेगी। मोदी पिछले साल अप्रैल में पहली अनौपचारिक बैठक के लिए चीन के वुहान गए थे। दोनों नेता बैंकॉक में 31 अक्टूबर से 4 नवंबर के बीच होने वाली आसियान समिट में भी मिलेंगे।जिनपिंग के साथ चीन के विदेश मंत्री और पोलित ब्यूरो के सदस्य भी भारत आएंगे। इस बैठक के लिए कोई एजेंडा तय नहीं है। लेकिन, भारत-प्रशांत क्षेत्र, सीमा विवाद, आतंकवाद, कारोबारी असंतुलन, टेरर फंडिंग के मुद्दे पर चर्चा होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। दूसरी ओर, जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 हटाए जाने के बाद से बौखलाए पाकिस्तान की नजर इस मुलाकात पर टिक गई है। उसे उम्मीद है कि चीन इस मामले को भारत के सामने उठाएगा। हालांकि, भारत पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि कश्मीर उसका आंतरिक मुद्दा है और कोई भी देश इसमें दखल न दे।

 

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