Sat. Feb 27th, 2021

विशेष प्रतिनिधि

मुंबई ।अपनी शानदार गायकी से लोगों के दिलों में खास जगह बनाने वाले मोहम्मद रफी के गुजरने के 40 साल बाद उनके बेटे के लिए अपना पैतृक घर बचाना मुश्किल हो रहा है। बांद्रा की 28 रोड स्थित रफी मेन्शन 1970 के दशक में रफी ने बनवाया था। इसके लिए उनके बेटे शाहिद रफी को कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ रही है। एचडीएफसी बैंक ने कोर्ट में याचिका दाखिल कर इमारत की पांचवीं मंजिल पर स्थित शाहिद के फ्लैट पर कब्जा मांगा है। जो बंगला रफी ने बनवाया था उसे 1980 में गिराकर यह इमारत बनवाई गई थी। बैंक ने दावा किया है कि शाहिद ने निंबस इंडस्ट्रीज लिमिटेड नाम की कंपनी ने फ्लैट बेचने की डील की थी और कंपनी ने फ्लैट खरीदने के लिए बैंक से 4.16 करोड़ का कर्ज लिया था।
निंबस पैसे वापस नहीं कर पाया तो बैंक ने कोर्ट में संपत्ति पर दावा ठोका है। शाहिद ने बताया फ्लैट की कीमत करीब 5 करोड़ रुपए है। उन्होंने कहा वह निंबस को प्रॉपर्टी बेचना नहीं चाहते थे, बल्कि नवंबर 2017 में एक कर्ज चुकाने के लिए सिर्फ कुछ वक्त के लिए एक समझौता किया था। उन्होंने कहा कंपनी ने जितने पैसे देने के लिए कहा था उतने दिए नहीं, इसलिए समझौता निभाया नहीं गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि अथॉरिटीज के पास समझौते का रजिस्ट्रेशन नहीं कराया गया था, तो उसे मानने की कोई वजह नहीं है।
कोर्ट ने यह कहते हुए शाहिद को राहत देने से इनकार कर दिया कि डील को कैंसिल किया गया, इससे पता चलता है कि बिक्री हुई थी। हालांकि, डेट रिकवरी ट्रिब्यूनल ने स्टे देकर उन्हें राहत दी है।
शाहिद ने बताया उनके नाम यह इकलौता घर है। उन्होंने कहा कि इस इमारत से उनकी बहुत सी यादें जुड़ी हैं क्योंकि इसी जगह वह बंगला था जिसमें रफी रहे थे। टेड रिकवरी ट्रिब्यूनल में उन्होंने बताया कि निंबस से समझौते में उन्हें सिर्फ 1.95 करोड़ रुपए मिले, जबकि समझौते में 3.16 करोड़ रुपए का जिक्र है। उन्होंने बताया कि निंबस के डायरेक्टर ने उनसे कोई भी चेक डिपॉजिट नहीं करने के लिए कहा था। एडवोकेट फिरोज भरूचा ने एचडीएफसी बैंक की ओर से कहा कि शाहिद और निंबस के बीच समझौता पूरा हुआ है जिसके कारण बैंक के पास प्रॉपर्टी जब्त करने का अधिकार है।

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