Mon. Sep 13th, 2021

नई दिल्ली। दिल्ली यातायात पुलिस अथवा आरटीओ को मोबाइल पर इलेक्ट्रानिक आरसीटी, डीएल अथवा पीयूसी सर्टिफिकेट दिखाने वाले वाहन चालकों के लिए शुभ सूचना है। सरकार ने कहा है कि इलेक्ट्रानिक कागजात उतने ही मान्य और वैध है जितने कि कागजी दस्तावेज। इसलिए कोई भी अधिकारी कागजी दस्तावेजों के लिए बाध्य नहीं कर सकता। इस संबंध में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की ओर से सभी राज्यों के पुलिस महानिदेशकों तथा परिवहन सचिवों को एडवाइजरी भेजी गई है। इसमें कहा गया है कि सरकार ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 139 में संशोधन कर दिया है। इस संबंध में 2 नवंबर, 2018 को गजट अधिसूचना भी जारी की जा चुकी है। संशोधित नियम के मुताबिक कोई भी नागरिक किसी भी वर्दीधारी पुलिस अधिकारी अथवा राज्य सरकार द्वारा अधिकृत किसी भी अन्य अधिकारी के मांगने पर उसे रजिस्ट्रेशन, इंश्योरेंस, फिटनेस व परमिट, ड्राइविंग लाइसेंस, पीयूसी अथवा किसी भी अन्य सर्टिफिकेट को कागजी अथवा इलेक्ट्रानिक किसी भी रूप में दिखा सकता है।
इससे कागजात की जांच व पुष्टि डिजिटल रूप में करने में सहूलियत के साथ आनलाइन सिस्टम को बढ़ावा मिलेगा। इसलिए नागरिकों का उत्पीड़न रोकने के लिए इस प्रावधान के बारे में सभी संबंधित अधिकारियों को अवगत कराने के साथ-साथ इसे लागू कराएं। डिजिटल दस्तावेज से यहां अभिप्राय वाहन और सारथी पोर्टल से प्राप्त डिजिटल सर्टिफिकेट अथवा एसएमएस पर प्राप्त दस्तावेज है। सड़क मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार संशोधित सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2008 के अनुसार इलेक्ट्रानिक दस्तावेज कागजी दस्तावेजों की तरह ही वैध और मान्य हैं। लेकिन इसके बावजूद लोगों से लगातार इस बात की शिकायत मिल रही थी कि अधिकारी इलेक्ट्रानिक दस्तावेज स्वीकार नहीं करते हैं। इसलिए मंत्रालय को केंद्रीय मोटर नियम में संशोधन करना पड़ा।
इस बीच सरकार एक अन्य नियम में संशोधन करने जा रही है। जिसके मुताबिक अब 16 वर्ष के किशोर भी 25 सीसी अथवा उससे कम क्षमता की इलेक्ट्रिक बाइक चलाने का लाइसेंस प्राप्त कर सकेंगे। इसके लिए ई-बाइक की इंजन अधिकतम क्षमता को 0.25 किलोवाट से बढ़ाकर 4 किलोवाट तक किया जा रहा है। सड़क मंत्रालय के अधिकारी के अनुसार चार किलोवाट की ई-बाइक सामान्य पेट्रोल बाइक की तरह की 60-70 किमी की स्पीड पर चल सकती है। इससे युवा वर्ग इन ई-बाइकों को खरीदेगा, क्योंकि ई-बाइक का लाइसेंस 16 वर्ष में बन जाता है। अभी केवल 0.25 किलोवाट तक की ई-बाइकों की अनुमति है, जिनकी रफ्तार सीमित होती है। इसलिए युवाओं में ये लोकप्रिय नहीं हो रही थीं।

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