Fri. Apr 23rd, 2021

विशेष संवाददाता

नई दिल्ली । दिल्ली हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है। जिसमें केंद्र सरकार को यह निर्देश देने के लिए कहा गया कि वह सोशल मीडिया अकाउंट को आधार या पैन या वोटर आईडी कार्ड या फिर किसी भी आइडेंटी प्रूफ से लिंक किया जाए। जिससे कि फर्जी, डुप्लीकेंट या घोस्ट अकाउंट की पहचान की जा सके। इससे भ्रामक खबरों और पेड न्यूज को नियंत्रित किया जा सके। सोशल मीडिया के दुरुपयोग को रोकने के लिए उच्चतम न्यायालय में इस मामले में सुनवाई होगी। सुनवाई जनवरी 2020 के आखिरी सप्ताह में हो सकती है। सोशल मीडिया अकाउंट को आधार से जोड़ने से संबंधित याचिकाएं मद्रास, मध्य प्रदेश और बंबई उच्च न्यायालय में लंबित हैं। अब भारत सरकार नए साल की शुरुआत में ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हेट स्पीच को फैलाने वालों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करने जा रही है।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना मंत्रालय यानी एमईआई ने सोशल मीडिया साइट्स पर रोक लगाने के लिए शीर्ष अदालत में हलफनामा दायर किया है। इस हलफनामे में कहा गया है कि सोशल साइट्स पर हेट स्पीच समेत अन्य कार्यों पर लगाम लगाने के लिए नियम बनाए जाएं, जिससे यह प्लेटफॉर्म सुरक्षित और बेहतर बन सके। सरकार ने अपने हलफनामे में कहा है कि हम फेसबुक, इंस्टाग्राम और ट्विटर जैसे प्लेटफॉर्म पर पोस्ट किए कंटेंट को लेकर विचार कर कर रहे हैं कि इसका जिम्मेदार सोशल मीडिया प्रोवाइडर है या नहीं। सरकार ने कहा कि हम सोशल मीडिया के लिए 15 जनवरी 2020 से नए नियम लेकर आएंगे और साथ ही प्रोवाइडर्स को भी इसकी जानकारी देंगे।

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