Tue. Apr 13th, 2021

विशेष संवाददाता

नई दिल्ली । देश की प्रसिद्ध यूनिवर्सिटी जामिया मिल्लिया इस्लामिया में 22 अक्टूबर को शाम से देर रात तक हंगामा होता रहा। जामिया के छात्र वीसी नज़मा अख्तर के कार्यालय के बाहर हज़ारों की संख्या में इकट्ठा होकर नारेबाज़ी करते रहे और जामिया के बाहर भारी पुलिस बल तैनात रहा। सूत्रों के अनुसार जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में मंगलवार शाम करीब 5 बजे जमकर मारपीट और तोड़फोड़ हुई। छात्रों का आरोप है कि यूनिवर्सिटी प्रशासन के लोगों ने उनके साथ मारपीट की। ये पूरा मामला इज़इारल के विरोध से जुड़ा है। दरअसल अक्टूबर माह के शुरूआत में जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में एक कान्फ्रेंस थी, जिसमें इजराइल के भी प्रतिनिधि शामिल थे। जामिया के कुछ छात्रों ने इसका विरोध किया और फलस्तीन के समर्थन में नारेबाज़ी की। जामिया प्रशासन ने विरोध करने वाले 5 छात्रों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया। इसके बाद छात्रों ने धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। जिन छात्रों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, उन्होंने जामिया प्रशासन को जवाब देने से मना कर दिया। 22 अक्टूबर मंगलवार के दिन यूनिवर्सिटी के इंग्लिश विभाग में एक और सेमिनार था, इस मौके पर अलग अलग यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर यहां आए हुए थे। सेमिनार खत्म होने के बाद जब लोग जब वापस जा रहे थे तो प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने उनका रास्ता रोक दिया। इस दौरान मारपीट भी हुई औऱ रास्ते में गमले रख दिए ताकि गाडिया ना जा सके।
जामिया के जनसम्पर्क अधिकारी अहमद अज़ीम का कहना है कि ये छात्रों के दो गुटों के बीच लड़ाई हुई, इससे जामिया प्रशासन का कोई लेना देना नही था। अहमद अज़ीम ने कहा कि जिन छात्रों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था उन्होंने उसे जला दिया। यूनिवर्सिटी में अगर अनुशासन नहीं होगा तो पढ़ाई कैसे होगी। वही पिछले कई दिन से प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ यूनिवर्सिटी प्रशासन, जामिया टीचर्स एसोसिएशन और पूर्व छात्रों के संघ के बीच कई दौर की बैठक हो चुकी है। प्रदर्शन कर रहे छात्रों से कहा गया था कि यूनिवर्सिटी को डिस्टर्ब न करें और कानून व्यवस्था को बनाए रखें, साथ ही यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के माहौल को बनाए रखें। जामिया के बाहर आज भी भारी पुलिस तैनात है।

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