Tue. Apr 13th, 2021

विशेष संवाददाता

लखनऊ । उत्तर प्रदेश की 11 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस को मिली करारी शिकस्त के बाद भी कांग्रेस के खेमे में खुशी नजर आ रही है। दरअसल, यूपी उपचुनाव में भले ही कांग्रेस एक भी सीट न जीत सकी हो, लेकिन इस उपचुनाव में कांग्रेस के वोट शेयर में अप्रत्याशित बढोत्तरी हुई है। 11 सीटों पर हुए उपचुनाव में भाजपा गठबंधन ने 8 और सपा ने 3 सीटो पर कब्ज़ा किया है। सन 2019 के लोकसभा चुनाव में यूपी की नंबर दो पार्टी रही बसपा भी इस उपचुनाव में अपना खाता नहीं खोल सकी। उपचुनाव में कांग्रेस ने बसपा से भी बेहतर प्रर्दशन किया। उत्तर प्रदेश में लंबे समय से हाशिए पर चल रही कांग्रेस में जान फूंकने के लिए प्रियंका गांधी के प्रयास रंग लाते दिख रहे है। जिसके चलते कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव और यूपी प्रभारी प्रियंका गांधी के नेतृत्व में एक के बाद एक सत्ता के खिलाफ किए गए प्रर्दशनों का स्पष्ट असर उपचुनाव में भी देखने को मिला। भले ही कांग्रेस एक भी सीट न जीत सकी हो, लेकिन 2017 के विधानसभा में उसे मिले महज 6.25 फीसदी वोट शेयर में इस बार करीब दोगुना बढोत्तरी हुई है। उपचुनाव में कांग्रेस को 12.80 फीसदी वोट मिले।
कांग्रेस इस उपलब्धि को जनता में प्रियंका गांधी का बढ़ता विश्वास मान रही है। उसका कहना है कि प्रियंका के नेतृत्व में न सिर्फ जनता में कांग्रेस के प्रति विश्वास बढा है, बल्कि इस उपचुनाव में कांग्रेस को पिछले चुनाव में मिले 6.25 फीसदी वोट से करीब दोगुना अधिक 12.80 फीसदी वोट मिले है। यह कांग्रेस के लिए किसी शुभ संकेत से कम नहीं है। उधर विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस का सर्वाधिक वोट प्रतिशत बढा है, तो भाजपा के वोट प्रतिशत में सर्वाधिक गिरावट भी देखने को मिली है। इस दौरान भाजपा ने भले ही अपनी 9 सीटो में से 8 सीटों पर दोबारा जीत दर्ज कर ली हो, लेकिन उसका वोट प्रतिशत करीब 14 फीसदी कम हुआ है। विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस के वोट प्रतिशत में हुई दोगुनी वृद्धि पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने भी अपनी खुशी का इजहार किया।
अजय कुमार लल्लू ने ट्विटर पर लिखा ‘विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस का वोट प्रतिशत पिछली बार से दोगुना हुआ है। परिवर्तन की शुरूआत हो चुकी है। कांग्रेस मतदाताओं के फैसले का सम्मान करती है। सभी कर्मठ नेताओं और कार्यकर्ताओं का हृदय से आभार। उत्तर प्रदेश के इस विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस को न सिर्फ 12.80 फीसदी मत मिले है, बल्कि कांग्रेस 11 सीटों में से 2 सीटों पर दूसरे नबंर और 5 सीटों पर तीसरे नबंर पर रहकर पिछले चुनाव की अपेक्षा इस बार शानदार प्रर्दशन किया।
कांग्रेस ने गंगोह और गोविंदनगर में दूसरे नंबर पर रहकर भाजपा को टक्कर दी, तो जैदपुर, लखनऊ कैंट, इगलास, प्रतापगढ और रामपुर में भी कांग्रेस तीसरे नंबर पर रही। ऐसे में अगर कांग्रेस की माने तो सहारनपुर की गंगोह सीट पर कांग्रेस हारी नही बल्कि भाजपा की तानाशाही और बेइमानी से हराई गई है। कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता और नवनियुक्त यूपी कांग्रेस के मीडिया प्रभारी राजीव त्यागी के मुताबिक ‘सहारनपुर की गंगोह सीट पर कांग्रेस के उम्मीदवार शुरू से ही लगातार 27वें राउंड तक बढ़त बनाए हुए थे, लेकिन अंत में भाजपा सरकार के इशारे पर स्थानीय प्रशासन ने कांग्रेस प्रत्याशी नोमान मसूद, चुनाव मतगणना के एजेंट और मीडिया कर्मियों को भी मतगणना स्थल से हटा दिया. चुनाव परिणाम में धांधली कर भाजपा के प्रत्याशी को चुनाव जितवा दिया। इसके विरोध में कांग्रेस पार्टी ने वहां पर धरना-प्रदर्शन कर आक्रोश व्यक्त किया और लखनऊ में मुख्य चुनाव आयुक्त से मिलकर अपना विरोध दर्ज कराकर निष्पक्ष जांच एवं पुर्नमतगणना की मांग की है।

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