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विशेष प्रतिनिधि 

पटना । बिहार के जमुई जिले के बरहट थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाला केडिया गांव प्रदेश में जैविक खेती का केंद्र बन गया है। प्रदेश के कृषि मंत्री प्रेम कुमार ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि जैविक कृषि क्रांति की पहल करने वाला केडिया गांव अब किसी परिचय का मोहताज नहीं है।
केडिया गांव के जीवित माटी किसान समिति की ओर से जैविक खेती को बढावा देने के लिए गत 23 अक्टूबर को जश्न-ए-जैविक महोत्सव का आयोजन किया गया था, जिसमें दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, उडीसा, आंध्रपदेश, छत्तीसगढ राज्य से शोधकर्ता के साथ बिहार के कई अन्य जिलों के किसान अपने जैविक उत्पादों के साथ शामिल हुए। केडिया गांव के किसानों द्वारा आयोजित इस जश्न-ए-जैविक महोत्सव में भाग लेते हुए कृषि मंत्री प्रेम कुमार ने कहा कि जैविक कृषि क्रांति की पहल करने वाला केडिया गांव अब किसी परिचय का मोहताज नहीं रहा। यह गांव समूचे बिहार को जैविक खेती की राह दिखा रहा है। उन्होंने जैविक कॉरिडोर का जिक्र करते हुए कहा बिहार सरकार केंद्र सरकार के साथ मिलकर जैविक खेती को बढ़ावा देने का काम कर रही है।
प्रेम ने लोगों से जैविक उत्पाद का स्वयं सेवन करने तथा दूसरों को खिलाने का आहवान करते हुए कहा कि जैसे सिक्किम राज्य जैविक राज्य हो चुका है, हमारा भी लक्ष्य है कि बिहार को जैविक राज्य बनाएं और इस मुहिम में केडिया गांव का योगदान महत्वपूर्ण होगा। केडिया गांव के जीवित माटी किसान समिति के सचिव राजकुमार यादव ने बताया कि 2014 में उनके गांव के कुछ लोगों का रुझान प्राकृतिक खेती की तरफ बढा और रासायनिक खाद और कीटनाशक मुक्त खेती की शुरूआत कर दी गई।
इस समिति से गांव के 45 किसान जुडे हुए हैं। केडिया गांव में 110 परिवार हैं और इसकी आबादी करीब 600 है। बिहार स्टेट सीड एंड आर्गेनिक सर्टिफिकेशन एजेंसी (बसोका) के निदेशक अशोक प्रसाद ने बताया कि कृषि विभाग की ओर से जैविक खेती प्रोत्साहन योजना चलाई जा रही थी और उसके तहत उस गांव के 10 लोगों ने वर्मी कम्पोस्ट की इकाई स्थापित की। उन्होंने अपने गांव के अन्य लोगों को इसके लिए प्रोत्साहित किया। वर्तमान में केड़िया गांव में 250 से ज्यादा वर्मीबेड यूनिट काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि गोबर गैस का प्लांट लगाने के साथ इस गांव के लोगों ने धीरे धीरे जैविक खाद की मदद से सब्जी सहित अन्य फसल उगाना शुरू किया।
पूरे गांव के लोगों ने आपसी सहमति से यह तय कर लिया कि अब जहर मुक्त खेती करेंगे और कृषि कार्य में किसी भी प्रकार के रसायन का इस्तेमाल नहीं करेंगे। केड़िया में कुल 22 बायोगैस संयंत्र हैं। उन्होंने बताया कि जैविक खेती करने के साथ मनरेगा योजना के तहत केडिया गांव के किसानों ने मवेशी पालने के लिए शेड भी बनवाए हैं जिसमें गोमूत्र आदि एकत्रित करते हैं। उन्होंने बताया कि सिक्किम स्टेट आर्गेनिक सर्टिफिकेशन एजेंसी (सोका) के साथ समझौते पत्र हस्ताक्षर होने पर 2017 के अंत में सबसे पहले इस समिति का निबंधन कराया गया।
इन्हें 2018 में सी वन सर्टिफिकेट मिल गया तथा पिछले सप्ताह सोका के लोग केडिया गांव पहुंचकर जांच कर लौट गए हैं और इस साल इस संघ को सेकंड-ए मिल जाएगा। अशोक ने बताया कि केडिया गांव के बिहार का पहला जैविक खेती करने वाला गांव बनने के बाद प्रदेश में अब तक तीन अन्य को सी वन सर्टिफिकेट मिल गया है और 5 अन्य का निबंधन हो चुका है तथा राज्य में करीब 250 हेक्टयर में जैविक खोती की जा रही है।

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