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विशेष संवाददाता

नई दिल्ली । सचिवों की एक समिति कर्ज से दबे टेलीकॉम सेक्टर की परेशानियों का जायजा लेकर दिक्कतें दूर करने के उपाय बताएगी ताकि वोडाफोन आइडिया और भारती एयरटेल जैसी कंपनियों के लिए राहत का इंतजाम किया जा सके। इन कंपनियों पर 80000 करोड़ की अतिरिक्त वैधानिक देनदारी बन गई है। अतिरिक्त देनदारी की स्थिति एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू के बारे में दूरसंचार विभाग के रुख को सुप्रीम कोर्ट से मंजूरी मिलने के बाद बनी है। दूरसंचार विभाग के अधिकारियों ने बताया कि कैबिनेट सेक्रेटरी राजीव गाबा की अध्यक्षता वाली सचिवों की समिति स्पेक्ट्रम पेमेंट से दो साल (वित्त वर्ष 2020 और वित्त वर्ष 2021 के लिए) की छूट देने जैसे कदमों पर विचार करेगी। ताकि कंपनियों की कैश फ्लो सिचुएशन ठीक हो सके। इसके अलावा समिति लाइसेंस फीस में शामिल यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन फंड और स्पेक्ट्रम यूसेज चार्जेज में कमी करने पर भी विचार करेगी। यूएसओएफ अभी एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू के 5 प्रतिशत और एसयूसी अभी एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू के करीब 3 प्रतिशत के बराबर है। समिति में टेलिकॉम, फाइनैंस और लॉ मिनिस्ट्रीज के सचिवों को शामिल किया जा सकता है।
एक अधिकारी ने बताया कि टेलिकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया भी इसके साथ वॉइस और डेटा सर्विसेज के लिए मिनिमम चार्ज के पहलू पर गौर कर सकता है ताकि टेलिकॉम सेक्टर की फाइनैंशल हेल्थ ठीक रखी जा सके। ईटी ने 24 अक्टूबर के अंक में खबर दी थी कि सरकार इस सेक्टर को लॉन्ग टर्म सपोर्ट देने के लिए मिनिमम टैरिफ तय करने पर विचार कर रही है। तीखी प्राइस वॉर के बीच यह सेक्टर आमदनी में कमी, कैश फ्लो में नरमी और 7 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के कर्ज से जूझ रहा है। तीन प्राइवेट कंपनियों में से रिलायंस जियो ही अभी मुनाफे में है। इंडस्ट्री की संस्था सेल्युलर ऑपरेटर्स असोसिएशन ऑफ इंडिया के जरिए कंपनियों ने सरकार से अनुरोध किया है कि वह रिलीफ पैकेज पर जल्द कदम बढ़ाए।

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