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विशेष संवाददाता

नई दिल्ली । महाराष्ट्र में भाजपा और शिवसेना के बीच जारी सियासी रस्साकशी में मोदी मंत्रिमंडल के पहले विस्तार की संभावना भी छिपी हुई है। दरअसल महाराष्ट्र की सत्ता का विवाद का हल निकालने के लिए भाजपा के फार्मूले में केंद्र में सहयोगी शिवसेना के लिए राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) का प्रस्ताव भी है। अगर शिवसेना राजी हुई तो भाजपा दूसरी सहयोगी जदयू के लिए भी एक कैबिनेट और एक राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) का पद देने का प्रस्ताव रखेगी। ऐसे में शीतकालीन सत्र से ठीक पहले या तत्काल बाद मोदी मंत्रिमंडल का विस्तार हो सकता है। दरअसल महाराष्ट्र में भले ही शिवसेना मुख्यमंत्री पद और ढाई साल के कार्यकाल पर अड़ी हुई है, मगर अंदरखाने दोनों ही ओर से विवाद सुलझाने की कोशिशें भी हो रही हैं। शिवसेना की ओर से उद्घव ठाकरे की जगह एकनाथ शिंदे को विधायक दल का नेता चुने जाने से भी इस आशय का संकेत मिलता है। जाहिर तौर पर ठाकरे की जगह शिंदे को आगे कर शिवसेना ने प्रतीकात्मक रूप से सीएम पद का दावा छोड़ दिया है। इससे पहले शिवसेना की ओर से ठाकरे को भावी सीएम के रूप में दर्शाने वाले पोस्टर भी लगाए गए थे।

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