Tue. Mar 2nd, 2021

विशेष प्रतिनिधि

लखनऊ । हिन्दूवादी नेता और हिन्दू समाज पार्टी के अध्यक्ष कमलेश तिवारी के हत्यारों अशफाक और मोइनुद्दीन को हथियार (पिस्टल) देने वाले युवक युसूफ खां को एटीएस ने शुक्रवार शाम कानपुर से धर दबोचा है। वह हरबंश मोहाल के घंटाघर इलाके में रिश्तेदार के घर आया था। युसूफ की गिरफ्तारी के बाद देर रात तक एटीएस के अधिकारी उससे पूछताछ करते रहे। उधर, हत्यारों के अन्य मददगारों के बारे जानकारी जुटाने के लिये पुलिस ने जेल पहुंच कर पूछताछ की है। फतेहपुर के हथगांव थाना क्षेत्र के रायपुर मुवारी निवासी युसूफ सूरत में एक दुकान पर काम करता था। वहीं, उसकी मुलाकात राशिद पठान, अशफाक और मोईनुद्दीन से हुई थी। युसूफ ने वर्ष 2018 में ही अशफाक और मोईनुद्दीन को सूरत में पिस्टल दी थी। गुजरात और यूपी एटीएस ने युसूफ के पास से दो मोबाइल बरामद किये हैं। अधिकारी उससे पूछताछ कर यह जानने का प्रयास कर रहे हैं कि हत्यारों को देने के लिये पिस्टल उसने कहां से और किससे ली थी। उसके मोबाइल फोन की कॉल डिटेल खंगाली जा रही है। जिससे साफ हो सके कि युसूफ ने हत्यारों के अलावा किन लोगों से सम्पर्क किया था।
पुलिस सूत्रों का कहना है कि बेहद गुपचुप तरीके से जेल पहुंची पुलिस ने सबसे पहले वकील नावेद और कामरान से कई सवाल जवाब किये। फिर इन लोगों ने बाकी मददगारों को बुलवाया। बताया जा रहा है कि कुछ तथ्य और पता चले थे। इनका मिलान कराने के लिए इन लोगों से पूछताछ करने के लिए पुलिस जेल गई थी। अशफाक से लगातार सम्पर्क में रहने वाले वकील नावेद ने कामरान की मदद से ही दोनों आरोपियों को नेपाल में शरण दिलायी थी। नावेद के पकड़े जाने के बाद कई राज खुले थे। हालांकि उसने पूछताछ में एटीएस और एसआईटी को खूब उलझाया था। नावेद से पूछताछ में सामने आई कड़ियां जुड़ती गई थी जिससे इस हत्याकाण्ड का करीब-करीब हर राज सामने आ गया था। इसी दौरान दो मददगारों के भी नाम सामने आये थे जो कामरान की गिरफ्तारी के बाद से गायब हो गए हैं। चर्चा है कि ये दोनों फिलहाल नेपाल में छिप गए हैं।
सूत्रों का कहना है कि नागपुर से गिरफ्तार आसिम के सम्पर्क में भी फरार मददगार थे। आसिम ने जब अशफाक से बरेली जाने को कहा था, तभी उसने नावेद से लेकर अपने सम्पर्क में रहने वाले हर व्यक्ति को दोनों आरोपियों की मदद करने के लिये तैयार रहने को कह दिया था। 18 अक्टूबर को खुर्शेदबाग में कमलेश तिवारी की हत्या के बाद आसिम अली के इशारे पर ही पूरा नेटवर्क फैलाया गया था। एसआईटी के एक अधिकारी के मुताबिक एक टीम ने बरेली और शाहजहांपुर में कई जगह दबिश दी। एसआईटी को पता चला था कि नावेद और कामरान के साथ मदद करने वालों में शामिल दो लोग इन स्थानों पर ही छिपे हुए हैं। हालांकि पुलिस को दबिश में कोई सफलता नहीं मिली।

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