Tue. Mar 2nd, 2021

विशेष प्रतिनिधि

नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पसंदीदा योजना पीएम-किसान सम्मान निधि का लाभ देशभर के किसान उठा रहे हैं, लेकिन पश्चिम बंगाल के 70 लाख किसान इसके लाभों से वंचित हैं। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी केंद्र सरकार द्वारा शुरु की गई इस योजना को नापसंद करती हैं। यही वजह है राज्य में यह योजना अब तक लागू नहीं हो पाई है। शुरुआत में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी पीएम-किसान योजना के आलोचक थे, मगर बाद में उन्होंने इसे अपने राज्य में लागू कर दिया। पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी अब भी इस योजना की मुखर आलोचक बनी हुई हैं। इसलिए यह योजना अब तक पश्चिम बंगाल में लागू नहीं की जा सकी है। केंद्र और पश्चिम बंगाल सरकार की इस तकरार में गरीब किसान पिस रहे हैं। प्रदेश के किसानों इस योजना का लाभ लेना चाहते हैं। केंद्र सरकार द्वारा पीएम किसान सम्मान निधि पोर्टल पर खुद ऑनलाइन पंजीयन करने का विकल्प देने के बाद प्रदेश के 45,000 किसानों ने इस पर अपना पंजीयन करवाया है। मगर, पंजीकृत किसानों को पीएम-किसान सम्मान निधि का लाभ तभी मिल पाएगा, जब प्रदेश सरकार इनकी पात्रता का सत्यापन करे।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय में संयुक्त सचिव और पीएम-किसान सम्मान निधि के सीईओ विवेक अग्रवाल ने कहा कि पीएम-किसान सम्मान निधि पोर्टल पर पंजीकृत किसानों के विवरण राज्य सरकारों के पास भेजे जाते हैं, जहां से आधार और भू-राजस्व के रिकॉर्ड की जांच के बाद उनकी पात्रता की जांच की जाती है। जांच की इन प्रक्रियाओं से गुजरने के बाद ही पात्र किसानों के खाते में पीएम-किसान योजना की राशि का हस्तांतरण किया जाता है। ऐसे में पश्चिम बंगाल के किसानों को पीएम-किसान का फायदा तभी मिल पाएगा, जब राज्य सरकार उनकी पात्रता का सत्यापन करेगी। बनर्जी के इस रुख को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अक्सर संकीर्ण राजनीतिक मानसिकता का परिचायक बताती रही है। मगर, राजनीतिक दलों के बीच इस तकरार से किसानों का हक मारा जा रहा है। भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी अग्रवाल ने बताया कि पीएम-किसान सम्मान निधि का लाभ देश के 7।20 करोड़ किसानों को मिलने लगा है, जिन्हें अब तक 33,000 करोड़ रुपए का भुगतान किया जा चुका है।
पीएम-किसान सम्मान निधि में एक किसान परिवार को सालाना 6,000 रुपए सीधे ट्रांसफर किया जाता है। तीन किस्तों में इस राशि का भुगतान किया जाता है और प्रत्येक किस्त की राशि 2,000 रुपए होती है। किसानों को इस योजना का लाभ पिछले साल दिसंबर महीने से ही दिया जा रहा है। मगर, किसान जब इस योजना से जुड़ते हैं और इसके तहत अपना पंजीकरण करवाते हैं, उसी समय से उनको योजना का लाभ मिलता है। ऐसे में पश्चिम बंगाल के किसान अब तक तीन किस्तों यानी 6,000 रुपए का लाभ पाने से वंचित रह गए हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *