वायुसेना का लड़ाकू विमान हादसे का हुआ शिकार, पायलट ने बचाई अपनी जान

कुुशीनगर। विशेष संवादाता
उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में सोमवार को ट्रेनिग के दौरान वायु सेना का एक लड़ाकू विमान हादसे का शिकार हो गया। यह हादसा कुशीनगर के हेतीमपुर के पास हुआ है।
जानकारी के अनुसार यह एक जगुआर लड़ाकू विमान था, जिसे ट्रेनी पायलट उड़ा रहा था। यह जगुआर गोरखपुर एयरबेस से 12ः15 बजे सामान्य अभ्यास की उड़ान पर निकला था। कुशीनगर के हाटा टोल प्लाजा के ऊपर उड़ते हुए उसमें आग लग गयी। जिसको देखते हुए पायलट ने किसी तरह उसे आबादी के ऊपर गिरने से बचाया और फाइटर प्लेन के खेत में गिरते ही उसमें आग लग गई। इसके पूर्व ही पायलट ने पैराशूट का प्रयोग किया और कूदकर किसी तरह अपनी जान बचाई। प्लेन के गिरने की वजह से आसपास रहने वाले लोगों में हड़कंप मच गया। इसके पूर्व पिछले साल 20 मार्च 2018 को भी वायुसेना का एक लड़ाकू विमान हादसे का शिकार हो गया था। इस हादसे को लेकर पायलट अरविंद कुमार ने विमान में आई गड़बड़ी को देख पहले उसका रुख नदी की तरफ कर दिया था और पैराशूट लेकर छलांग लगा दी। इसके बाद पायलट स्वर्णरेखा नदी के बालू में गिर गए थे, जिससे उन्हें आंशिक चोट लगी।
हालाकि एअरफोर्स का राहत हेलीकॉप्टर मौके पर पहुंच गया है। इस सम्बन्ध में एयरफोर्स के पीआरओ ग्रुप कैप्टेन अरविंद सिन्हा ने बताया कि हादसे की वजह ब्लैक बॉक्स की जांच से ही पता चलेगी।

उड़ान भरने के 10 मिनट बाद ही क्रैश हुआ वायुसेना का लड़ाकू विमान जगुआर
उत्तरप्रदेश के कुशीनगर में सोमवार की दोपहर वायुसेना का लड़ाकू विमान जगुआर उड़ान भरने के कुछ देर बाद ही क्रैश हो गया। इस विमान ने गोरखपुर एयरबेस से उड़ान भरी थी। क्रैश होने से ठीक पहले पायलट विमान से बाहर निकलने में कामयाब रहे। पायलट के सूझ-बूझ विमान आबादी वाले इलाके में क्रैश ना होकर खेतों में जा गिरा, जिससे आमजन को कोई नुकसान नहीं हुिआ। बीते साल जून 2018 गुजरात के कच्छ में भी लड़ाकू विमान जगुआर क्रैश हुआ था जिसमें पायलट संजय चैहान शहीद हो गए थे। बताया जा रहा है कि ये विमान ट्रेनिंग के दौरान रुटीन उड़ान भर रहा था, लेकिन उड़ान भरने के 10-15 मिनट के अंदर ही दुर्घटनाग्रस्त हो गया। गौरतलब है कि वायुसेना में जगुआर काफी खास किस्म का लड़ाकू विमान है। यह दुश्मन की सीमा में काफी अंदर तक घुसकर हमला कर सकते हैं। लड़ाकू विमान जगुआर की मदद से आसानी से दुश्मन के कैंप, एयरबेस और वॉरशिप्स को निशाना बनाया जा सकता है। जगुआर की खासियत है कि वह कम ऊंचाई पर उड़ान भरकर भी दुश्मन की नाक में दम कर सकता है।

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