देश की पहली प्राइवेट मेट्रो के 267 कर्मचारियों पर लटकी छंटनी की तलवार

विशेष संवाददाता

दिल्ली। देश की पहली प्राइवेट मेट्रो के टेकओवर के साथ-साथ अब इसके संचालन में कार्यरत स्टाफ पर छंटनी की तलवार लटक गई है। रैपिड मेट्रो का संचालन कर रही दो कंपनियों में 267 अधिकारी और कर्मचारी काम करते हैं। इन कर्मचारियों पर प्रतिमाह करीब 1.34 करोड़ रुपए वेतन के रूप में खर्च किया जाता है। इसे टेकओवर करने के 3 महीने बाद डीएमआरसी और एचएमआरटीसी की तरफ से फैसला लिया जाएगा कि मेट्रो के संचालन में उन्हें किस स्टाफ की आवश्यकता है और किसकी नहीं? रैपिड मेट्रो का संचालन रैपिड मेट्रो गुड़गांव लिमिटेड (आरएमजीएल) और रैपिड मेट्रो गुड़गांव साउथ लिमिटेड (आरएमजीएसएल) कर रही है। आरएमजीएल में 101 अधिकारी और कर्मचारी हैं, जबकि आरएमजीएसएल में 166 स्टाफ कार्यरत है। दोनों कंपनियों में 1 सीनियर वाइस प्रेसीडेंट, 3 जनरल मैनेजर, 3 डिप्टी जनरल मैनेजर, 3 मैनेजर, 5 डिप्टी मैनेजर, 18 असिस्टेंट मैनेजर, 184 ऑफिसर, 21 ऑफिस स्टाफ, 25 थर्ड पार्टी के तहत नियुक्त स्टॉफ और 4 रिटेनर्स हैं।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेशानुसार, रैपिड मेट्रो को 16 अक्टूबर से पहले हरियाणा सरकार को टेकओवर करना है। टेकओवर करने के 3 महीने के बाद डीएमआरसी और एचएमआरटीसी की तरफ से देखा जाएगा कि कौन सा स्टाफ कितनी सेलरी पर नियुक्त है? और क्या काम कर रहा है? क्या उस स्टाफ की उन्हें जरूरत है या नहीं? इसके बाद तय किया जाएगा कि कितने स्टाफ की छंटनी की जाए? सूत्रों के मुताबिक, इसकी जानकारी एकत्रित करने के लिए हूडा के चीफ एडमिनिस्ट्रेटर डी सुरेश ने भी 3 दिन पहले रैपिड मेट्रो ऑफिस का मुआयना किया था।
25 सितंबर को रेपिड मेट्रो टेकओवर को लेकर चीफ सेक्रेटरी केसनी आनंद अरोड़ा ने बैठक ली थी। इसमें एचएमआरटीसी के अधिकांश डायरेक्टर मौजूद थे। अरोड़ा ने टेकओवर को लेकर समीक्षा की थी। जीएमडीए के सीईओ, वी उमाशंकर ने बताया कि रैपिड मेट्रो टेकओवर प्रक्रिया को पूरा करवाने के लिए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने दो जजों को जिम्मेदारी सौंपी है। अभी इनकी उपलब्धता नहीं हो सकी है। उपलब्धता होते ही रैपिड मेट्रो का टेकओवर कर लिया जाएगा।

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