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विशेष संवाददाता

नई दिल्ली । ब्रिटेन में नये वीजा नियमों के लागू होने से स्वास्थ्य के क्षेत्र में पेशेवरों को काम करना काफी आसान होगा। नए वीजा नियमों में दो अलग अंग्रेजी परीक्षाओं की बाध्यताएं खत्म करने के कारण ब्रिटेन में डॉक्टरों, नर्सों और स्वास्थ्य क्षेत्र के अन्य पेशेवरों को काम करने में सहूलियत होगी। पहले उम्मीदवारों के लिए ब्रिटेन में स्वास्थ्य क्षेत्र से संबंधित नियामक में पंजीकरण और आव्रजन उद्देश्यों के लिए दो अलग-अलग परीक्षा में सफल होना जरूरी था। ब्रिटिश काउंसिल ने गैर अंग्रेजी भाषी उम्मीदवारों के लिए इंटरनेशनल इंग्लिश लैंग्वेज टेस्टिंग सिस्टम (आईईएलटीएस) का आयोजन किया। ब्रिटिश काउंसिल इंग्लिश एंड एक्जामिनेशन सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड में निदेशक माइकल किंग ने कहा, ‘हम रोमांचित हैं कि ब्रिटेन ने हाल में स्वास्थ्य क्षेत्र के अंतरराष्ट्रीय पेशेवरों के लिए अंग्रेजी दक्षता परीक्षाओं को सुगम बनाया है। भारतीयों और अन्य अंतरराष्ट्रीय पेशेवरों के लिए यह अच्छी खबर है क्योंकि अब ब्रिटेन में काम करने के लिए उन्हें बस एक बार परीक्षा देनी होगा।’ पहले उम्मीदवारों को नर्सिंग एंड मिडवाइफरी काउंसिल और जनरल मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण कराने के लिए आईईएलटीएस या ओईटी परीक्षा में बैठना पड़ता था। इसके अलावा वीजा आवेदन के लिए आईईएलटीएस (यूकेवी) में भी सफल होना जरूरी था। ब्रिटिश काउंसिल के मुताबिक, स्वास्थ्य क्षेत्र के पेशेवर के तौर पर पंजीकरण के लिए अंग्रेजी जांच का पैमाना पहले से ही बहुत कड़ा होने के कारण इस प्रक्रिया के दोहराव की जरूरत नहीं थी और वीजा नियमों में बदलाव से स्वास्थ्य पेशेवरों के लिए ब्रिटेन में काम करना आसान होगा।

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