Fri. Apr 23rd, 2021

दिल्ली पुलिस का कारनामा

नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की पासपोर्ट वेरिफिकेशन से जुड़ी स्पेशल ब्रांच में भारी अनियमितताओं का पता लगा है। स्पेशल ब्रांच के कुछ कर्मचारियों ने मोटी रकम लेकर दिल्ली में रह रहे अफगानिस्तान के 52 नागरिकों के भारतीय पासपोर्ट बना दिए। ये पासपोर्ट असली थे, लेकिन इन्हें बनवाने में लगाए गए सभी दस्तावेज फर्जी थे।
इस मामले की विभागीय जांच चल रही है। इस मामले में अब तक तीन पुलिसवाले सस्पेंड हो चुके हैं। इनके अलावा भी कई पुलिसवाले इस रैकेट में शामिल हो सकते हैं। सूत्रों ने बताया कि इस फर्जीवाड़े की शुरुआत करीब 6 महीने पहले हुई थी। यह पासपोर्ट दो बार में बनवाए गए। पहली बार 15 अफगानियों के पासपोर्ट बनाए गए। यह काम कुछ दलालों के माध्यम से किया गया। दूसरी बार में 37 विदेशियों के भारतीय पासपोर्ट बनवाए गए। जिन लोगों के पासपोर्ट बनाए गए, वे सभी 52 अफगान विदेश भागने की फिराक में थे। इस बारे में कई बार संपर्क करने के बावजूद पुलिस के आला अफसरों ने जवाब नहीं दिया है।
कथित रूप से दो करोड़ रुपए लेकर जिन 52 अफगानी नागरिकों के भारतीय पासपोर्ट बनवाए गए, वे सभी वेस्ट दिल्ली में किराए के मकानों में रहते थे। इन विदेशी नागरिकों में से किसी के पास दिल्ली का स्थाई पता नहीं था। एड्रेस प्रूफ के तौर पर कोई भारतीय सरकारी दस्तावेज नहीं था। सूत्रों ने बताया कि 52 विदेशी नागरिक वेस्ट दिल्ली के पंजाबी बाग, राजौरी गार्डन और तिलक नगर इलाके में रहते थे। आरोप है कि पासपोर्ट बनवाने के लिए आवेदन करने वाले की तमाम पुलिस वेरिफिकेशन का काम स्पेशल ब्रांच द्वारा किया जाता है।
ऐसे में इस ब्रांच के ही कुछ पुलिसकर्मियों ने इन विदेशी नागरिकों को दस्तावेज बनवाने का रास्ता दिखाया। ज्यादातर दस्तावेज दलालों के माध्यम से उन्होंने खुद ही तैयार कराए। वे सब फर्जी थे। यह फर्जीवाड़ा यूं ही चलता रहता, अगर इसकी सूचना एक पुलिसवाले ने ही विभाग को नहीं दी होती। सही समय पर इसकी जानकारी पुलिस के आला अधिकारियों तक पहुंच गई और मामले की उच्चस्तरीय जांच शुरू कर दी गई। इससे इस मामले की परतें खुलती गईं। इस मामले में स्पेशल ब्रांच से जुड़े आला अधिकारी कोई प्रतिक्रिया नहीं कर रहे हैं।
एक विश्वसनीय सूत्र ने बताया कि मामला पुराना हो चुका है। पुलिस ने इस गड़बड़झाले को मीडिया से छिपाने की पूरी कोशिश की गई थी। स्टाफ को सख्त हिदायतें थीं कि किसी भी सूरत में यह मामला मीडिया में लीक नहीं होना चाहिए। हालांकि, घटना के कुछ माह बाद मीडिया इस मामले की तह तक जा पहुंचा। हालांकि, अभी इस मामले में कई सवालों के जवाब नहीं मिल पाए हैं।

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