Thu. Feb 25th, 2021

-सवाल उठाने वालों को लगाई फटकार 

विशेष संवाददाता 

नई दिल्ली । अनुच्छेद-370 को खत्म करने के बाद जम्मू एवं कश्मीर में पाबंदी के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि क्या अथॉरिटी को तब तक इंतजार करना चाहिए था जब तक कि वहां दंगा नहीं भड़क जाता? जस्टिस एनवी रमन्ना की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने इंडियन जर्नलिस्ट्स यूनियन की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल से कहा कि इस तरह के मसले पर क्यों नहीं यह अंदेशा होना चाहिए कि पूरा इलाका या जगह अशांत हो सकता है? वास्तव में पीठ ने यह टिप्पणी तब कि जब सिब्बल ने कहा कि अथॉरिटी द्वारा कश्मीर में संचार व परिवहन सेवा में पाबंदी उचित नहीं है। सिब्बल ने पीठ से कहा कि शांति भंग होने की आशंका को लेकर बिना किसी तथ्य व प्रमाण के अथॉरिटी इस तरह की पाबंदी नहीं लगा सकती। उन्होंने कहा कि, आखिर सरकार यह कैसे मानकर चल सकती है कि पूरी आबादी खिलाफ हो सकती है और वहां कानून-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न हो सकती है। उन्होंने कहा घाटी में दस जिले हैं, क्या 70 लाख लोगों को पंगु बनाना जरूरी था? हम यहां जम्मू एवं कश्मीर के लोगों केअधिकार की बात नहीं कर रहे हैं बल्कि भारत के लोगों के अधिकारों की बात कर रहे हैं।अगली सुनवाई 14 नवंबर को होगी।

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