Sat. Feb 27th, 2021

विशेष प्रतिनिधि

नई दिल्ली। करतारपुर कॉरिडोर के बहाने दुनिया के सामने अच्छा होने का दिखावा करने वाले पाकिस्तान का नापाक चेहरा उजागर हुआ है। पाक ने दरबार साहिब गुरुद्वारा के समक्ष 1971 की जंग के दौरान गिराए गए भारतीय वायुसेना के एक बम की नुमाइश की है। पाक ने इस बम के बारे में लिखा है कि जंग के वक्त गुरुद्वारे को तबाह करने के लिए इस पर बम गिराया गया था, मगर वाहेगुरुजी के चमत्कार के चलते यह बच गया। माना जा रहा है कि करतारपुर कॉरिडोर के थीम सॉन्ग के बाद पाक की इस करतूत पर विवाद खड़ा हो सकता है। दरअसल, एक निजी समूह का हिस्सा रहे कुछ भारतीयों ने पाक के इस कारनामे को उजागर किया, जो हाल ही में पाकिस्तान के करतारपुर में दरबार साहिब गुरुद्वारा गए थे। उन्होंने कहा कि पाक सरकार ने गुरुद्वारा परिसर में एक प्रदर्शनी लगाई है, जिसमें 1971 की जंग के दौरान भारतीय वायुसेना द्वारा गिराए गए बम को बाकायदा एक खंभे पर बने शीशे के बॉक्स में रखा गया है। खंभे को खंडा (सिख धर्म का प्रतीक चिह्न) से सजाया गया है। इसके बगल में ही एक बोर्ड लगाया गया है, जिस पर इस बारे में पूरा विवरण है और इसका शीर्षक दिया गया है ‘वाहेगुरुजी का चमत्कार’। इसमें यह भी कहा गया है कि श्री खूह साहिब (पवित्र कुआं) और दरबार साहिब पर यह बम गिरा, मगर इससे दोनों पवित्र स्थलों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा। माना जाता है कि इस पवित्र कुएं से गुरुनानक देव अपने खेतों की सिंचाई किया करते थे।
इससे पहले पाकिस्तान की ओर से एक वीडियो जारी किया गया था। इस वीडियो को पाकिस्तान सरकार ने तीन टुकड़ों में जारी किया था। वीडियो में खालिस्तानी आतंकवादी भिंडरावाला समेत 3 आतंकवादियों की तस्वीर दिखाए जाने के बाद से नया विवाद खड़ा हो गया था।
भाजपा नेता तेजिंदर सिंह बग्गा ने यह फोटो शेयर कर ट्वीट किया, करतारपुर साहिब की ये तस्वीर पाकिस्तान के घटिया और घिनौने चेहरे को दिखाती है। 1947 में बंटवारे के बाद सिखों के अरदास में की गई थी मांग ‘श्री ननकाना साहिब ते होर गुरुद्वारेयां, गुरुधामां दे, जिनां तों पंथ नूं विछोड़या गया है, खुले दर्शन दीदार ते सेवा संभाल दा दान खालसा जी नूं बख्शो…। ननकाना साहिब और बाकी गुरुद्वारे या गुरुधाम जो बंटवारे के चलते पाकिस्तान में रह गए उनके खुले दर्शन सिख कर सकें, इसकी हम मांग करते हैं। 1947 में हुए बंटवारे के बाद सिखों की अरदास में इस लाइन को जोड़ा गया।
ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि बंटवारे के बाद कई ऐतिहासिक गुरुद्वारे पाकिस्तान की तरफ रह गए। इनमें पंजा साहिब, ननकाना साहिब, डेरा साहिब लाहौर और करतारपुर साहिब शामिल हैं। इन गुरुद्वारों में भारतीयों के जाने पर पाबंदी थी। सिख संगत का 70 साल लंबा इंतजार शनिवार को खत्म हो गया। करतारपुर सिखों का पवित्र तीर्थ स्थल है जहां गुरुनानक देव ने अपने जीवन के अंतिम 18 साल बिताए।
करतारपुर कॉरिडोर से पाकिस्तान करतारपुर साहिब जाने वाले तीर्थयात्री अधिकतम 11 हजार रुपये और सात किलो तक का एक बैग ही ले जा सकेंगे। श्रद्धालुओं को सिक्के ले जाने की भी इजाजत नहीं है। संगत को धर्मस्थल के अलावा कहीं और जाने की इजाजत नहीं होगी। तीर्थयात्रा के दौरान पर्यावरण के अनुकूल सामग्री (जैसे कपड़े के बैग) का इस्तेमाल करना होगा और क्षेत्र की स्वच्छता को बनाए रखना होगा। पॉलीथीन बैग पर पूर्ण पाबंदी है। गुरदासपुर में डेरा बाबा नानक में पैसेंजर टर्मिनल बिल्डिंग कॉम्प्लेक्स (पीटीबी) के भीतर धूम्रपान, शराब और तंबाकू के इस्तेमाल की इजाजत नहीं होगी। तेज आवाज में संगीत बजाना और बिना अनुमति अन्य लोगों की तस्वीरें लेने की मंजूरी भी नहीं होगी। 14 से 70 साल के लोग ही करतारपुर कॉरिडोर के रास्ते करतारपुर साहिब दर्शन करने जा सकेंगे। वहीं, बार एसोसिएशन के पूर्व प्रधान व वकील मनदीप सिंह सचदेवा का कहना है कि सिख श्रद्धालु अपनी कमाई का कुछ हिस्सा धार्मिक स्थलों पर चढ़ाते हैं, 11 हजार की राशि काफी कम है। इसको अधिक किया जाना चाहिए।
– लाहौर में स्थित है 39 गुरुद्वारा साहिबान
करतारपुर साहिब के साथ-साथ पाकिस्तान में सिख धर्म से जुड़े 153 पवित्र स्थान हैं। पाकिस्तान पंजाब में हर साल गुरु नानक नाम लेवा संगत इन गुरुद्वारा साहिबान के दर्शनों के लिए आती है। पाकिस्तान सरकार ने बीते सात दशकों में 20 गुरुद्वारा साहिबान को संगत के दर्शनों के लिए खोला है।
पाकिस्तान के वक्फ बोर्ड के रिकॉर्ड के अनुसार पाकिस्तान के कसूर जिले में 17 गुरुद्वारा साहिबान हैं। लाहौर में सबसे अधिक 39 गुरुद्वारा साहिबान हैं। इनमें से केवल चार गुरुद्वारा साहिबान ही संगत के दर्शनों के लिए खोले गए हैं। गुजरांवाला में 10 गुरुद्वारे और 11 गुरुद्वारा साहिब सियालकोट में स्थित हैं। रावलपिंडी, शेखूपुरा और ओकारा में पांच-पांच गुरुद्वारे हैं।
– कई गुरुद्वारा साहिबान का होगा जीर्णोद्धार: अमीर सिंह
पाकिस्तान के झंग इलाके में चार गुरुद्वारे, हाफिजाबाद में चार, साहिवाल में पांच, झेलम में पांच, जबकि वीर, डेरा गाजी खान, मुल्तान, फैसलाबाद, खुशब, बहावलपुर, खानवेल और बन्नू जिलों में एक-एक गुरुद्वारा साहिब स्थित हैं। डेरा इस्माइल खान में तीन गुरुद्वारा साहिब हैं। मनसेरा, पेशावर और हजारा में भी एक-एक गुरुद्वारा साहिब है। पाकिस्तान गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के महासचिव अमीर सिंह के अनुसार पीएसजीपीसी ने कई गुरुद्वारों का जीर्णोद्धार समय पर पूरा करवाया है। आगामी कुछ वर्षों में कई और गुरुद्वारा साहिब का जीर्णोद्धार कर उन्हें दर्शनों के लिए खोल दिया जाएगा।

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