Mon. Mar 1st, 2021

-संजय निरुपम ने किया विरोध, पडवी बोले अवसर का लाभ उठाइए

विशेष संवाददाता 

मुंबई । महाराष्ट्र में सरकार बनाने को लेकर असमंजस बरकरार है। कांग्रेस तय नहीं कर पा रही है कि वह सरकार बनाने में शिवसेना का सहयोग करे या नहीं करे। हालांकि, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) को सरकार बनाने का न्योता मिलने के बाद कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मंगलवार को कोर कमेटी की बैठक बुलाई है। इस बीच, कांग्रेस के अंदर से दो तरह सुर सुनाई दे रहे हैं। केसी पडवी ने शिवसेना के साथ मिलकर सरकार बनाने का समर्थन किया है, तो दूसरी ओर संजय निरुपम ने शिवसेना के साथ गठबंधन का विरोध कर रहे हैं।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता संजय निरुपम ने कहा कि कांग्रेस के पास महाराष्ट्र में सरकार बनाने की कोई नैतिक जिम्मेदारी नहीं है। अस्थिरता के लिए हम पर कोई भी आरोप लगाना गलत है। यह भाजपा और शिवसेना की विफलता है, जिसने राज्य को राष्ट्रपति शासन की चौखट पर ला खड़ा किया है। वहीं, केसी पडवी ने कहा प्रक्रिया अभी चल रही है, लेकिन अंतिम रिजल्ट सकारात्मक होगा। व्यक्तिगत रूप से मुझे लगता है कि तीनों (शिवसेना-कांग्रेस-एनसीपी) पार्टी सरकार बनाएंगे और शिवसेना का नेता मुख्यमंत्री होगा।
सोमवार को शिवसेना को सरकार बनाने के बारे शाम साढ़े सात बजे तक राज्यपाल को बता देना था, लेकिन वह इसमें नाकाम रही। उसे राज्यपाल ने मंगलवार रात साढ़े आठ बजे तक का समय दिया है। कांग्रेस ने बैठक की, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। इस बीच राकांपा नेता अजित पवार राजभवन पहुंचे और सरकार बनाने को लेकर राज्यपाल से बात की। गौर करने वाली सबसे प्रमुख बात यह है कि कांग्रेस और शिवसेना में सत्ता के नियम और शर्तों के लिए कोई सीधी बात नहीं हो रही है। उद्धव ठाकरे ने भले ही एक बार सोनिया गांधी को फोन किया हो, लेकिन सोनिया गांधी को जो भी कहना है वह शरद पवार के जरिए कह रही हैं। ऐसे में पवार रातों रात उद्धव ठाकरे की सबसे बड़ी मजबूरी बन गए हैं।

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