Mon. Mar 1st, 2021

विशेष संवाददाता

अयोध्या । अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की तैयारियों को लेकर मंदिर कार्यशाला में सरगर्मी तेज हो गई है। साथ ही राम जन्मभूमि न्यास के पदाधिकारी और विहिप अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत अगले एक्शन प्लान पर मंथन कर रहे हैं। मंदिर के प्रस्तावित मॉडल के मुताबिक पत्थरों को तराशने का काम फिर से शुरू करने के पहले कई व्यवस्थाओं को पूरा करने पर विचार किया जा रहा है। इस बीच मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद कार्यशाला में आने वाले चढ़ावे में दस गुना का इजाफा हुआ है। मंदिर के पत्थरों की व्यवस्था के प्रभारी प्रकाश कुमार गुप्त ने बताया कि बड़े काम करने हैं। कारीगरों को बड़ी संख्या में बुलाने से पहले पत्थरों को काटने की मशीन को ठीक करवाना होगा। साथ ही रामसेवकपुरम में रखे पत्थरों का आकार बहुत बड़ा (17X4.5 फुट) है, जिनको कार्यशाला तक लाने के लिए बड़ी शक्तिशाली क्रेन की जरूरत पड़ेगी। पहले इनको दो क्रेनों को लगाकर उतारा गया था। इस बात पर भी गंभीरता से मंथन किया जा रहा है कि अधिग्रहीत 67 एकड़ जमीन केंद्र सरकार से वापस करवाई जाए, जिसमें 48 एकड़ जमीन राम जन्मभूमि न्यास की है। तराशकर कार्यशाला में रखे गए पत्थरों को सावधानी से मंदिर स्थल के करीब शिफ्ट करवाया जाए।
पत्थरों को रामलला कैंपस में ले जाने के लिए सुरक्षित चौड़ी सड़क की भी जरूरत है। गुप्ता ने बताया यह व्यवस्था करने के बाद ही बड़ी संख्या मे कारीगरों को पत्थरों को तराशने के लिए बुलाया जा सकेगा। बताया जाता है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर राम मंदिर के लिए सोमनाथ मंदिर अथवा मां वैष्णो देवी मंदिर जैसा ट्रस्ट बनाने के बारे में भी राम जन्मभूमि न्यास और विहिप सोच रहे हैं। हालांकि कोर्ट ने अपने आदेश में ट्रस्ट बनाने की जिम्मेदारी सरकार को सौंपी है।
राम मंदिर के वैधानिक कार्य और इससे जुड़े दूसरे काम देखने वाले विहिप के संगठन मंत्री त्रिलोकीनाथ पांडे के मुताबिक मंदिर निर्माण में धन की कमी सामने नहीं आएगी। लोग दान देना चाहते हैं। राम मंदिर के पत्थरों और अन्य कार्य के लिए मंदिर आंदोलन के दौरान शिलापूजन कार्यक्रम में 3 लाख गांवों से प्रत्येक व्यक्ति से डेढ़ रुपए दान लिया गया था, जिससे 8 करोड़ का फंड न्यास के खाते में जमा हुआ था। उसी से मंदिर के पत्थरों को तराशने का काम 1991 से अनवरत जारी है।
पांडे ने बताया कि कार्यशाला की जमीन अयोध्या राजघराने से दान में मिली है। वहीं, रामसेवकपुरम कार्यशाला की जमीन को विहिप और राम जन्मभूमि न्यास ने मिलकर खरीदा है। दूसरी ओर कारसेवकपुरम की जमीन विहिप और इससे जुड़े संगठनों के सहयोग से खरीदी गई थी। शिला पूजन के दौरान जमा 8 करोड़ रुपए में से न्यास के खाते में अब भी कार्यशाला में काम जारी रखने के लिए धन मौजूद है।

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