Fri. Apr 23rd, 2021

पुरुलिया (पश्चिम बंगाल)। पश्चिम बंगाल के मानभूम अंचल में बसे पुरुलिया में स्थित बाघमुंडी में अयोध्या पहाड़ के नीचे मुक्ताकाशी मंच पर लुप्तप्राय नचनी नृत्य-शैली की दक्ष कलाकार पोस्तोबाला को आकर्षक समारोह में वर्ष 2018 के ‘वारियर एल्विन सम्मान’ से नवाजा गया। उल्लेखनीय है कि इस प्राचीन नृत्य-शैली में नृत्यांगना झुमुर गीत गाकर लोकनृत्य प्रस्तुत करती है। पोस्तोबाला ने अपने अटूट समर्पण से इस कला-शैली को न सिर्फ़ जीवित रखा है, बल्कि इसे प्रतिष्ठा भी प्रदान की है।
सम्मान समारोह के इस अवसर पर एक सामयिक पत्रिका के प्रधान संपादक डॉ. सुधीर सक्सेना, कवि-पत्रकार देवाशीष चंद्र, कवि-पत्रकार श्याम अविनाश, पुरुलिया के विशिष्ट कवि निर्मल हालदार, कथाकार विमल लामा, कोलकाता से आये कवि-चित्रकार शुभाशीष भादुड़ी, कृष्ण नगर से आये युवा कवि-पत्रकार अभिमन्यु महतो, दिल्ली से पधारीं अनुवादक-कवयित्री अमृता बेरा आदि उपस्थित थे।
प्रख्यात नृतत्वशास्त्री एवं लेखक एल्विन की स्मृति में लोककलाओं के संवर्द्धन और प्रोत्साहन के लिए सन् 2016 में स्थापित यह सम्मान इससे पूर्व बस्तर के यशस्वी कलासाधक हरिहर वैष्णव को दिया जा चुका है। शुभाशीष भादुड़ी, अमृता बेरा और अभिमन्यु महतो की जूरी के निर्णय का हवाला देते हुए डॉ. सुधीर सक्सेना ने कहा कि कलाकार के प्रति सम्मान व्यक्त करने के प्रयोजन से पत्रिका कलाकार के घर जाकर उसे सम्मानित करने की परिपाटी में यक़ीन रखती है। इस अवसर पर विमल लामा ने कहा कि आर्थिक दुश्वारियों के बीच नचनिया अपने भीतर के कलाकार की अंत:प्रेरणा से इसे जीवित रखने के लिए इसका प्रदर्शन करती हैं। दुर्भाग्य से नयी पीढ़ी इसे सहेजने को लेकर गंभीर नहीं है। अन्य वक्ताओं ने इस पर हर्ष व्यक्त किया कि दिल्ली से आकर एक हिन्दी पत्रिका ने सुदूर पुरुलिया में लोक-कलाकार को सम्मानित किया है जो मानभूम अंचल के लिए गर्व का विषय है। भाव-विह्वल पोस्तोबाला ने कहा कि वह इस प्रसंग से अत्यंत गर्वित महसूस कर रही हैं। यह सम्मान वस्तुत: उन जैसी तमाम नचनियों और इस कला का सम्मान है।
इस अवसर पर उपस्थित उपरोक्त कवियों समेत सुमितपति, सोमा लामा ने अपनी रचनाओं का पाठ किया तथा पोस्तोबाला ने झुमुर गीत के साथ नृत्य का प्रदर्शन कर दर्शकों का मन मोह लिया। सम्मान समारोह के मौके पर श्याम अविनाश तथा निर्मल हालदार ने पत्रिका के बांग्ला साहित्य विशेषांक का विमोचन किया, जिसका संपादन सुश्री अमृता बेरा ने किया है। कार्यक्रम का संचालन सुश्री सोनाली चक्रवर्ती ने किया।

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