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विशेष प्रतिनिधि

भोपाल। मध्यप्रदेश में व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) की ओर से वर्ष 2013 में आयोजित आरक्षक भर्ती परीक्षा में हुई गड़बड़ी के मामले में सोमवार को सजा का ऐलान कर दिया गया। दोषी पाए गए 31 लोगों में से 30 को धारा 419, 420, 421 समेत अन्य धाराओं में 7 साल की सजा सुनाई गई है। वहीं मुख्य ब्रोकर प्रदीप त्यागी को धारा 467 और 471 के तहत 10 साल की सजा सुनाई गई है। इन सभी आरोपियों को सीबीआई की विशेष अदालत ने 21 नवंबर को दोषी करार दिया था। विशेष जज एसबी साहू की कोर्ट ने सजा का ऐलान किया है।व्यापमं से जुड़े 150 मामलों में से 14वें मामले में फैसला आया है, लेकिन पहली बार कोर्ट ने सभी आरोपियों को दोषी माना है। सजा पाने वालों में 12 परीक्षार्थी, 12 फर्जी परीक्षार्थी (जिन्होंने मुख्य परीक्षार्थियों की जगह परीक्षा दी) और 7 दलाल हैं। सभी आरोपियों को सेंट्रल जेल भेज दिया गया है। यह परीक्षा 15 सितंबर 2013 को हुई थी।
व्यापम में गड़बड़ी का बड़ा खुलासा 2013 में पहली बार पीएमटी परीक्षा के दौरान तब हुआ था, जब एक गिरोह इंदौर की अपराध शाखा की गिरफ्त में आया। यह गिरोह पीएमटी परीक्षा में फर्जी विद्यार्थियों को बैठाने का काम करता था। तत्कालीन मुख्यमंत्री चौहान ने इस मामले को अगस्त, 2013 में एसटीएफ को सौंप दिया था। बाद में नौ जुलाई, 2015 को मामला सीबीआई को सौंपने का फैसला हुआ और 15 जुलाई से सीबीआई ने जांच शुरू की।इस मामले में गवाही वर्ष 2014 से शुरू हुई और पांच साल तक गवाही चली। अभियोजन पक्ष ने दोषियों को सजा दिलाने के लिए 91 गवाहों और सबूतों को कोर्ट में पेश किया। दोषी करार दिए गए सभी लोगों पर आईपीसी की धाराओं 419, 420, 467, 468 और 471 के तहत केस दर्ज किया गया था।
मामले के दोषी जिन्हें 7-7 साल की सजा सुनाई गई है उनमें,राहुल पांडे, आशीष कुमार पांडे, कुलविजय, अभिषेक कटियार, सुयश सक्सेना, प्रभाकर शर्मा, नीरज उर्फ टिंकू, अनिल यादव, अजय सांकेरवार, धरमेश साहू, फूलकुंवर, देवेंद्र साहू, अजीत चौधरी, भूपेंद्र सिंह तोमर, संतोष शर्मा, चंद्रपाल कश्यप, पंजाब साहू, रविशंकर, नावीस जाटव, मुकेश साहू, अरूण गुर्जर, उदयभान साहू, दानिश धाकड़, अंतनदर साहू, पृथ्वेंद्र साहू तोमर, सुदीप शर्मा, अजय प्रताप साहू, कल्यानी साहू सिकरवार, गुलवीर सिंह जाट, राजवीर सिंह उर्फ बंटी है।
बता दें कि व्यापमं की शुरुआत जनवरी, 1970 में हुई थी। इसे पहले प्री-मेडिकल टेस्ट बोर्ड के नाम से जाना जाता था। उस दौरान इसका गठन मेडिकल परीक्षाओं के आयोजन करने के लिए किया गया था। 1981 में गठित प्री-इंजिनियरिंग बोर्ड को प्री-मेडिकल बोर्ड के साथ 1982 में मिला दिया गया। दोनों को मिलाकर व्‍यावसायिक परीक्षा मंडल का गठन किया गया। यह बोर्ड और भी शैक्षणिक संस्थानों में दाखिले के लिए परीक्षाएं आयोजित करता था। अब इसका नाम बदलकर प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड कर दिया गया है।

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