Mon. Mar 1st, 2021

विशेष प्रतिनिधि 

चेन्नई, प्रेट्र। उन्नत श्रेणी के बहुउद्देश्यीय सेटेलाइट कार्टोसैट-3 के साथ भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) 13 छोटे अमेरिकी सेटेलाइट को लॉन्च किया। इस सेटेलाइट के माध्यम से पृथ्वी की छोटी से छोटी गतिविधियों पर नजर रखी जा सकेगी। लॉन्च के 17 मिनट बाद PSLV-C47 ने कार्टोसैट को उसके ऑर्बिट में सफलतापूर्वक प्रक्षेपित कर दिया गया है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने बुधवार को सुबह 9:28 मिनट पर कार्टोसैट-3 को लॉन्च किया। इस खास मौके पर इसरो चीफ के. सिवन श्रीहरिकोटा मिशन कंट्रोल कॉम्प्लेक्स में मौजूद रहे। उनके साथ मिशन के इंजिनियर्स और इसरो के बड़े वैज्ञानिक मौजूद थे। कार्टोसैट-3 को भारत की आंख भी कहा जा रहा है, क्योंकि इससे बड़े स्तर पर अंतरिक्ष से पृथ्वी पर मैपिंग की जा सकेगी।
इसरो ने बताया कि श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर के दूसरे लांच पैड से आज सुबह 9.28 बजे कार्टोसैट-3 का प्रक्षेपण हुआ। इस श्रृंखला का यह नौवां सेटेलाइट है। एजेंसी ने बताया कि पीएसएलवी-सी 47 मिशन के लांच के लिए 26 घंटे का काउंट डाउन मंगलवार सुबह 7.28 बजे शुरू हुआ था।
पीएसएलवी-सी47 रॉकेट अपने साथ कार्टोसैट-3 और अमेरिका के 13 छोटे व्यावसायिक सेटेलाइट को लेकर उड़ान भरा है। कार्टोसैट-3 का कैमरा इतना ताकतवर है कि वह अंतरिक्ष से जमीन पर एक फीट से भी कम की ऊंचाई तक की स्पष्ट तस्वीरें ले सकता है।
कार्टोसैट-3 का कुल वजन लगभग 1,625 किलोग्राम है। यह सेटेलाइट शहर में नियोजन, ग्रामीण क्षेत्रों में ढांचागत विकास और संसाधनों की मैपिंग, तटवर्ती क्षेत्रों में भू उपयोग इत्यादि कामों में बहुत मददगार होगा। इसरो व्यावसायिक समझौते के तहत इस सेटेलाइट के साथ 13 अमेरिकी व्यावसायिक नैनोसेटेलाइट को भेजा है। इन अमेरिकी सेटेलाइटों में फ्लॉक-4पी और मेशबेड नामक सेटेलाइट भी शामिल है। फ्लॉक-पी4 पृथ्वी पर नजर रखेगा, जबकि, मेशबेड संचार परीक्षण करेगा।कार्टोसैट-3 पांच साल तक काम करेगा। जुलाई में मून मिशन चंद्रयान-2 के प्रक्षेपण के बाद इसरो यह पहला सेटेलाइट लांच किया गया।
देश के इमेजिंग सेटेलाइट कार्टोसैट-3 के लांच से पहले इसरो प्रमुख के. सिवन तिरुमला की पहाडि़यों पर स्थित भगवान वेंकटेश्वर के दरबार में पहुंचे। शिवन ने भगवान वेंकटेश्वर की पूजा अर्चना की। बाद में संवाददाताओं से बातचीत में सिवन ने कहा कि चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर ठीक तरह से काम कर रहा है और चंद्रमा के बारे में अहम सूचनाएं भेज रहा है। बता दें कि चंद्रयान-2 को सात जुलाई को लांच किया गया था। उसमें लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान भी थे। लैंडर को चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करनी थी, लेकिन आखिरी वक्त में उसका भू कक्षा से संपर्क टूट गया और उसकी हार्ड लैंडिंग हुई थी और दोनों ने काम करना बंद कर दिया।

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