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विशेष संवाददाता

नई दिल्ली । बीजेपी सांसद प्रज्ञा ठाकुर ने शुक्रवार को लोकसभा में अपने नाथूराम गोडसे बयान को लेकर माफी तो मांग ली, लेकिन इससे मामला शांत होने की जगह हंगामा और बढ़ गया। विपक्ष के साथ अपनी पार्टी के निशाने पर आईं प्रज्ञा ने दरअसल माफी तो मांगी, लेकिन इसके साथ ही खुद को बेकसूर बताते हुए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर भी जवाबी हमला बोल डाला। साध्वी के इस ‘परंतु’ वाली माफी से विपक्षी सांसद भड़क गए और उन्होंने हंगामा शुरू कर दिया। विपक्षी सांसदों की मांग थी कि बीजेपी सांसद को एक लाइन में स्पष्ट तौर पर माफी मांगनी चाहिए थी। हंगामे के बाद लोकसभा अध्यक्ष को सदन की कार्यवाही स्थगित कर मामला शांत करवाने के लिए सर्वदलीय बैठक बुलानी पड़ गई।अध्यक्ष की अनुमति मिलते ही प्रज्ञा ने नियम 222 का हवाला देते हुए अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा, ‘बीते घटनाक्रम में सबसे पहले मैं सदन में मेरे द्वारा की गई किसी भी टिप्पणी से यदि किसी भी प्रकार से किसी को ठेस पहुंची हो तो मैं खेद प्रकट कर क्षमा चाहती हूं।’ इसके साथ ही उन्होंने स्पष्टीकरण भी जोड़ दिया कि उनकी टिप्पणी नाथूराम गोडसे को लेकर नहीं थी। प्रज्ञा यहीं नहीं रुकीं और बिना नाम लिए राहुल गांधी को निशाने पर ले लिया। उन्होंने कहा कि पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष ने उनको आतंकी तक बता डाला है, जबकि उनके खिलाफ कोई ऐसा आरोप सिद्ध नहीं हुआ है।
उन्होंने आगे कहा, ‘परंतु मैं यह भी कहना चाहती हूं कि संसद में दिए गए मेरे बयानों को तोड़-मरोड़ कर गलत ढंग से पेश किया गया है। मेरे बयान का संदर्भ कुछ और था जिसे गलत ढंग से इस रूप में पेश कर दिया गया। जिस प्रकार से मेरे बयान को तोड़ा-मरोड़ा गया है, वो निंदनीय है।’ प्रज्ञा ने कहा कि महात्मा गांधी के प्रति उनके मन में श्रद्धा का भाव है। उन्होंने कहा, ‘महात्मा गांधी द्वारा देश के प्रति सेवा कार्य का मैं श्रद्धा और सम्मान करती हूं।’प्रज्ञा के इस बयान से पिछले दो दिन से जारी हंगामा और बढ़ गया। कांग्रेस के सांसद प्रज्ञा के इस बयान से भड़क गए। उनका कहना था कि सदन में एक लाइन में माफी मांगी जाती है, जबकि बीजेपी सांसद खुद का बचाव कर रही हैं। इस बीच विपक्षी सदस्यों का हंगामा जारी रहा। उन्होंने सदन में ‘महात्मा गांधी, जिंदाबाद’, महात्मा गांधी अमर रहें’, ‘डाउन डाउन गोडसे’ जैसे नारे लगाए। इस पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विपक्षी सांसदों को समझाने की कोशिश की और उन्हें अपनी-अपनी सीट पर बैठने का आग्रह किया, लेकिन हंगामा जारी रहा।
बाद में समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव ने लोकसभा अध्यक्ष को सलाह दी कि वह सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों को बुलाकर बात करें और मामले को सुलझाएं। मुलायम ने कहा, ‘हमारी राय यह है कि विपक्षी सदस्यों को जो परेशानी है, वह उसका इजहार कर रहे हैं। आप पांच-दस मिनट के लिए सदन बंद कर इधर और उधर के लोगों को बुलाकर बात कर लीजिए। यह हमेशा होता रहा है।’ इस पर स्पीकर ने कहा कि वह उनकी अच्छी राय पर विचार करेंगे।
इसके बाद संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि प्रज्ञा ने माफी मांगी है। माफी मांगने के बाद विपक्ष का यह व्यवहार ठीक नहीं है। उन्होंने स्पष्ट रूप से माफी मांगी है और महात्मा गांधी के विचार और उनकी सेवा पर उन्हें श्रद्धा है, ऐसा भी बयान दे चुकी हैं। इसलिए हंगामे का कोई बहाना नहीं बनाया जाना चाहिए।
जोशी ने कहा कि विपक्ष बेवजह इसे राजनीतिक मुद्दा बनाना चाहता है, यह ठीक नहीं है। लोकसभा अध्यक्ष ने इसके बाद सदन की कार्यवाही दोपहर तक स्थगित कर मामले को शांत करने के लिए सर्वदलीय बैठक बुला ली।

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