Mon. Mar 1st, 2021

विशेष संवाददाता

नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने लोकसभा में एंग्लो-इंडियन समुदाय के लिए चले आ रहे आरक्षण की व्यवस्था को खत्म करने का फैसला किया है। लोकसभा में एंग्लो-इंडियन समुदाय के लिए सीटें आरक्षित नहीं होंगी। लोकसभा की कुल 545 सीटों में से 2 एंग्लो-इंडियन समुदाय के लिए आरक्षित हैं। इसके लिए राष्ट्रपति इस समुदाय से 2 सदस्यों को नामित करते हैं।  लोकसभा में एंग्लो-इंडियन समुदाय के नामित सदस्य नहीं रहेंगे। एंग्लो-इंडियन से मतलब उन भारतीयों से हैं जो ब्रिटिश मूल के हैं।
मोदी कैबिनेट ने बुधवार को लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में एससी/एसटी आरक्षण को तो अगले 10 सालों के लिए बढ़ाने को मंजूरी दी। सरकार ने लोकसभा में एंग्लो-इंडियन समुदाय के लिए आरक्षण को आगे नहीं बढ़ाया है। अगर बाद में जरूरत महसूस हुई तब फिर से इस पर विचार किया जा सकता है। लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में एससी/एसटी आरक्षण को अगले 10 सालों के लिए बढ़ाने को लेकर संसद में बिल पेश किया जाएगा। बिल पारित होने के बाद इस आरक्षण की अवधि बढ़कर 25 जनवरी 2030 तक हो जाएगी। मौजूदा आरक्षण 25 जनवरी 2020 तक समाप्त होने वाली थी।
केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावडेकर जब कैबिनेट मीटिंग के बाद लिए गए फैसलों की जानकारी दे रहे थे तब उनसे पूछा भी गया था कि क्या एंग्लो-इंडियन आरक्षण को खत्म करने का फैसला हुआ है। जावडेकर ने इस सवाल का कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया और बस इतना कहा कि जब विधेयक संसद में पेश होगा तो सब कुछ स्पष्ट हो जाएगा। उन्होंने बताया कि संसद में अनुसूचित जाति के 84 सदस्य और अनुसूचित जनजाति के 47 सदस्य हैं । भारत में विधानसभाओं में अनुसूचित जाति के 614 सदस्य और अनुसूचित जनजाति के 554 सदस्य हैं।

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