Sun. Feb 28th, 2021

विशेष संवाददाता

नई दिल्ली । लोकसभा में सोमवार को नागरिकता संशोधन बिल पेश हुआ। इस दौरान विपक्ष ने जोरदार विरोध किया लेकिन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह लगातार हमलावर रहे। उन्होंने कहा कि नागरिकता बिल किसी भी तरह से संविधान का उल्लंघन नहीं करता है और ना ही ये बिल अल्पसंख्यकों के खिलाफ है। अमित शाह ने कहा कि ये बिल .001% भी अल्पसंख्यकों के खिलाफ नहीं है।कांग्रेस पर भड़कते हुए अमित शाह ने कहा कि इस बिल की जरूरत कांग्रेस की वजह से पड़ी। धर्म के आधार पर कांग्रेस ने देश का विभाजन किया। इस बिल की जरूरत नहीं पड़ती, अगर कांग्रेस ऐसा नहीं करती, कांग्रेस ने धर्म के आधार पर देश को बांटा।
अमित शाह ने कहा कि हर किसी ने आर्टिकल 14 के बारे में बात कही है, लेकिन ये आर्टिकल कानून बनाने से नहीं रोक सकता है। ऐसा नहीं है कि पहली बार नागरिकता के लिए इसका निर्णय हो रहा है, 1971 में इंदिरा गांधी ने निर्णय लिया कि बांग्लादेश से जितने लोग आए हैं उन्हें नागरिकता दी जाएगी, तो फिर पाकिस्तान को लेकर क्यों नहीं दी जाएगी।
गृह मंत्री ने कहा कि 1971 के बाद भी आज बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों को प्रताड़ित किया जा रहा है, युगांडा से आए हुए लोगों को कांग्रेस शासन में जगह दी गई, तो इंग्लैंड वाले लोगों को क्यों नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि अगर आर्टिकल 14 के आधार से चलें तो अल्पसंख्यकों के लिए स्पेशल एक्ट क्यों होगा. वहां पर क्यों नहीं नियम लागू करते हैं।
इस दौरान विपक्ष ने हंगामा किया तो अमित शाह ने गुस्से में कहा कि आप मुझे नहीं रोक सकते, हमारी सरकार चुन कर आई है उसके बारे में सुनना ही होगा। अमित शाह ने कहा कि हमारे देश की सीमा अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश से सटी है, ऐसे में इसलिए बिल में इनके बारे में जिक्र किया गया है। अमित शाह ने कहा कि मैं भूगोल का जानता हूं, मैं यहीं का हूं. और फिर कहता हूं कि पीओके भी हमारा हिस्सा है। इसी दौरान विपक्षी सीटों की तरफ से अखिलेश यादव ने कुछ कहा लेकिन अमित शाह ने कहा कि अखिलेश जी जल्दी समझ में नहीं आएगा। इस दौरान अमित शाह ने अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश के संविधान के बारे में बताया और कहा कि ये तीनों इस्लामिक देश हैं। पार्टिशन के वक्त कई लोग इधर आए गए, तब नेहरु-लियाकत समझौता हुआ उसमें दोनों देशों ने अपने यहां अल्पसंख्यकों के अधिकार की बात हुई। भारत मे तो अधिकार मिले लेकिन इन तीनों जगह नहीं हुआ।

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