Mon. Mar 1st, 2021

विशेष संवाददाता

कोलकाता । लोकसभा में मंगलवार को पास हुए नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 में भारतीय नागरिकता पाने का इंतजार कर रहे ‘योग्‍य’ शरणार्थियों के भारत में निवास की न्‍यूनतम अवधि घटाकर छह से पांच साल कर दी गई है। इस‍ बदलाव की वजह से दिसंबर 2014 से पहले भारत में प्रवेश करने वाले ऐसे शरणार्थियों को अब नागरिकता के आवेदन के लिए एक दिन भी इंतजार नहीं करना पड़ेगा। इसका असर सीधा बंगाल की राजनीति पर पड़ा है, इसलिए इस फैसले से बंगाल बीजेपी बहुत खुश है।
इससे पहले बिल में भारत में प्रवास की न्‍यूनतम अवधि को 11 साल से घटाकर 6 साल किया गया था। अब इसमें एक और साल की कमी करने से पांच साल पहले भारत में आए हिंदू, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन और पारसी शरणार्थियों की इंतजार की घड़ियां अब खत्‍म हो गईं हैं। साल 2016 में मूल नागरिकता बिल में प्रस्‍तावित था कि भारत में न्‍यूनतम छह साल प्रवास करने वाले शरणार्थियों की नागरिकता के आवेदन पर विचार किया जाएगा। उस स्थिति में जल्‍द से जल्‍द आवेदन की तारीख दिसंबर 2020 होती। मतलब 31 दिसंबर 2014 की कट ऑफ से छह साल बाद की तारीख, जिसका उल्‍लेख बिल में किया गया है। उस लिहाज से शरणार्थियों को एक साल और इंतजार करना पड़ता। लेकिन नए विधेयक में असमंजस की कोई गुंजाइश नहीं है। जो शरणार्थी दिसंबर 31, 2014 के पहले आए थे उनकी न्‍यूनतम अवधि पूरी होने में तीन सप्‍ताह से भी कम का समय बचा है। बिल को राज्‍यसभा से पास होकर राष्‍ट्रपति की मंजूरी मिलने में शायद इससे ज्‍यादा समय लगे।
बंगाल बीजेपी अध्‍यक्ष और एमपी दिलीप घोष का कहना है कि व लोकसभा में बिल के पास होने से बहुत खुश हैं। उन्‍होंने कहा, ‘ममता बनर्जी ने शरणार्थियों के वोट ले लिए लेकिन उन्‍हें नागरिकता देने पर कभी विचार नहीं किया।’ घोष ने बताया कि राज्‍य बीजेपी ने अक्‍टूबर में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से शरणार्थियों के लिए इस वेटिंग पीरियड को घटाने की बात कही थी ताकि उनके बीच कोई संदेह न रहे। बंगाल बीजेपी के महासचिव सायंतन बसु का कहना था, ‘इस विधेयक से ममता बनर्जी के हौसले ठंडे हो गए। वह शरणार्थियों को यह कहकर डरा रहीं थीं उन्‍हें अपने अधिकार छोड़ने हेांगे और नागरिकता के आवेदन के लिए उन्‍हें छह साल इंतजार करना होगा।’ इस बिल में यह भी कहा गया है कि भले ही शरणार्थी का नागरिकता के लिए आवेदन केंद्रीय गृह मंत्रालय के सामने लंबित हो वे अपने अधिकारों का प्रयोग जारी रख सकते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *