Tue. Apr 13th, 2021

विशेष संवाददाता

गुवाहाटी । नागरिकता संशोधन विधेयक (सीएबी) पर संसद में सियासी संग्राम के बीच असम में इस बिल का जबरदस्त विरोध हो रहा है। प्रदर्शन के दौरान राज्य सचिवालय के पास छात्रों और पुलिस के बीच झड़प हुई। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले भी दागे। प्रदर्शन को बढ़ता देख डिब्रूगढ़ में सेना बुला ली गई है। इस बीच कई ट्रेनों को या तो रद्द कर दिया गया है, या फिर उनके रास्ते बदल दिए गए हैं। कई ट्रेनों के टाइम-टेबल में भी बदलाव किया गया है।
पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी सुभानन चंदा ने एक बयान में कहा कि कम से कम 14 ट्रेनों को या तो रद्द कर दिया गया है या गंतव्य स्थान से पहले ही रोक दिया गया है या फिर ट्रेन परिचालन में बाधा को देखते हुए उनके रास्ते बदल दिए गए हैं। अवध असम एक्सप्रेस को न्यू तिनसुकिया से चलाने का निर्णय लिया गया है। यह डिब्रूगढ़ और न्यू तिनसुकिया के बीच रद्द रहेगी। वहीं, लीडो गुवाहाटी इंटरसिटी एक्सप्रेस, डिब्रूगढ़ फरकाटिंग गुवाहाटी इंटरसिटी एक्सप्रेस, नाहरलागुन तिनसुकिया इंटरसिटी एक्सप्रेस, डेकारगांव डिब्रूगढ़ इंटरसिटी एक्सप्रेस पूरी तरह से रद्द है। प्रदर्शन के दौरान राज्य सचिवालय के पास छात्रों के एक बड़े समूह और पुलिस के बीच झड़प हुई। सभी दिशाओं से बड़ी संख्या में छात्रों को सचिवालय की ओर बढ़ते देखा गया। वहीं, एक अन्य समूह गणेशगुरी क्षेत्र तक पहुंच गया, जहां सचिवालय सिर्फ 500 मीटर की दूरी पर है। छात्रों ने जीएस रोड पर अवरोधक को तोड़ दिया, जिसके बाद पुलिस ने लाठी चार्ज किया। छात्रों पर आंसू गैस के गोले भी दागे गए, जिसे उठाकर छात्रों ने पुलिसकर्मियों पर फेंक दिया।
छात्रों ने बताया कि उनमें से कई लाठीचार्ज में घायल हो गए। उन्होंने कहा, ‘सर्बानंद सोनोवाल के नेतृत्व में बर्बर सरकार है। जब तक सीएबी वापस नहीं लिया जाता है, तब तक हम किसी दबाव में नहीं आएंगे।’ गुवाहाटी के अलावा डिब्रूगढ़ जिले में प्रदर्शनकारियों की झड़प पुलिस से हुई और पत्थरबाजी में एक पत्रकार घायल हो गया।
बिल का विरोध कर रहे ऑल असम स्टूडेंट यूनियन (एएएसयू) ने कहा है कि वह इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगा। एएएसयू के मुख्य सलाहकार समुज्जल भट्टाचार्य ने केंद्र की बीजेपी सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि उत्तर पूर्व के लोग इस विधेयक को किसी भी हालत में स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने कहा, ‘हम लोग नागरिकता संशोधन विधेयक से लड़ने के लिए कानूनी रास्ता अपनाएंगे। हमने अपने वकीलों से बात की है और हम उनकी सलाह पर सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे। लोगों के प्रदर्शन और भारी भीड़ को देखते हुए असम के डिब्रूगढ़ में भारी संख्या में सुरक्षाबलों को तैनात किया गया है। पुलिस ने बताया कि स्थिति पर काबू पाने के लिए डिब्रूगढ़ में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर रबड़ की गोलियां चलाईं और लाठीचार्ज भी किया। उन्होंने बताया कि डिब्रूगढ़ शहर में एक पॉलिटेक्निक संस्थान के निकट प्रदर्शकारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे। हालांकि, बुधवार को किसी भी संगठन ने बंद नहीं बुलाया है।
जोरहाट, गोलाघाट, डिब्रूगढ़, तिनसूकिया, शिवसागर, बोंगाईगांव, नगांव, सोनीतपुर और कई अन्य जिलों में सुबह लोग बड़ी संख्या में सड़कों पर निकले। अधिकारियों ने बताया कि सड़कों पर टायर जलाए गए हैं। वाहनों और ट्रेन की आवाजाही रोकने के लिए सड़कों और पटरियों पर लकड़ियों के कुन्दे रख दिए गए हैं। डिब्रूगढ़ में चौलखोवा में रेलवे पटरियों और सड़कों से प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए लाठीचार्ज भी किया। जिले के मोरन में प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया गया और रबड़ की गोलियां चलाई गई। भट्टाचार्य ने आगे कहा कि विधेयक के खिलाफ छात्रों का आंदोलन शांतिपूर्ण होगा। उन्होंने महात्मा गांधी का हवाला देते हुए कहा, ‘यदि हमारा आंदोलन हिंसक होगा तो सरकार को मौका मिल जाएगा। हमें समझना होगा कि हमारे पास नागरिकता संशोधन विधेयक के खिलाफ अहिंसक आंदोलन के अलावा कोई और हथियार नहीं है।
नागरिकता संशोधन विधेयक के तहत 1955 के सिटिजनशिप ऐक्ट में बदलाव का प्रस्ताव है। इसके तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आकर भारत में बसे हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई शरणार्थियों को नागरिकता देने का प्रस्ताव है। इन समुदायों के उन लोगों को नागरिकता दी जाएगी, जो बीते एक साल से लेकर 6 साल तक में भारत आकर बसे हैं। फिलहाल भारत की नागरिकता हासिल करने के लिए यह अवधि 11 साल की है।

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