Sat. Feb 27th, 2021

विशेष प्रतिनिधि

नई दिल्ली । केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को राज्यों को भरोसा दिलाया कि केंद्र सरकार जीएसटी मुआवजे के अपने वादे से ‘पीछे नहीं हटेगी।’ उन्होंने कहा कि धनराशि देने में देरी की मुख्य वजह संग्रह में कमी है और राज्यों को इसको लेकर ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है। वित्त मंत्री की टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब महाराष्ट्र और केरल जैसे राज्य जल्द से जल्द मुआवजा दिए जाने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘यह निश्चित रूप से उनका अधिकार है, मैं इससे इनकार नहीं कर रही हूं। मैं यह भी स्पष्ट कर रही हूं कि हम इससे पीछे नहीं हट रहे हैं। राज्यों को मुआवजा दिया जाएगा। एक मीडिया समूह के कार्यक्रम में सीतारमण ने कहा, ‘मैं मानती हूं कि पिछले दो महीने से मुआवजा नहीं दिया गया है।’ अप्रत्यक्ष कर से जुड़े फैसले लेने वाली सबसे सशक्त संस्था जीएसटी परिषद की बैठक 18 दिसंबर को होने जा रही है।
एक तरह जहां कई मैक्रो इकोनॉमिक डाटा की गणना के तरीकों पर सवाल उठ रहे हैं, वहीं वित्त मंत्री ने कहा सरकार डाटा की विश्वसनीयता सुधारने पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी), महंगाई और रोजगार सहित कई पहलुओं पर गौर किया जा रहा है। सरकार पर डाटा की गणना के गलत तरीके अपनाने के आरोप लगने के कई महीनों के बाद उनकी यह टिप्पणी आई है। इस साल की शुरुआत में 100 से ज्यादा अर्थशास्त्रियों के एक समूह ने सार्वजनिक रूप से पत्र जारी करके ऐसी प्रवृत्तियों पर सवाल उठाए थे। आर्थिक विकास पर जीएसटी का असर दिखने में अभी वक्त लगेगा और इसके नतीजे रातोंरात नजर नहीं आएंगे। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) के चेयरमैन बिबेक देबरॉय ने सोमवार को यह बात कही। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) पर अभी काम जारी होने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जब इसे पेश किया गया था तो लोगों ने कहा था कि नई अप्रत्यक्ष कर प्रणाली से जीडीपी विकास दर में 1.5 से 2 फीसदी तक बढ़ोतरी देखने को मिलेगी।
उन्होंने कहा, ‘हकीकत में नेशनल काउंसिल ऑफ अप्लायड इकोनॉमिक रिसर्च (एनसीएईआर) ने आदर्श जीएसटी के वास्ते नौवें वित्त आयोग के लिए यह अनुमान दिया था। इस पर काम जारी है और इसमें 20 साल लग सकते हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि जीडीपी विकास दर रातोंरात 1.5 से 2 फीसदी (अतिरिक्त) बढ़ने जा रही है।’ भारत की जीडीपी विकास दर सितंबर तिमाही में घटकर 4.5 फीसदी रह गई थी। वहीं जीएसटी के अंतर्गत कर संग्रह भी लक्ष्य से कम ही रहा है। अक्तूबर में जीएसटी संग्रह 5.29 फीसदी घटकर 95,380 करोड़ रुपये रह गया, जबकि बीते साल समान महीने में यह लगभग 1 लाख करोड़ रुपये रहा था।

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