Thu. Apr 22nd, 2021

विशेष प्रतिनिधि

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री ने रामलीला मैदान से देशवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि देश में कोई डिटेंशन सेंटर नहीं है। उनके इस बयान पर कांग्रेस का पलटवार आया है। पार्टी का कहना है कि केवल गूगल सर्च करने से देशवासियों को सच्चाई का पता चल जाएगा और उनके दावे की रोल खुल जाएगी। उनका कहना है कि शाह के लोकसभा में दिए बयान के कारण देश में भ्रम की स्थिति बनी हुई है। विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने अपने ट्विटर हैंडल से ट्वीट करके कहा, ‘क्या प्रधानमंत्री मोदी का यह मानना है कि भारतीय एक साधारण गूगल सर्च के जरिए उनके झूठ का पता नहीं लगा सकते? डिटेंशन सेंटर की बात वास्तविक है और जब तक यह सरकार सत्ता में है तब तक यह बढ़ते रहेंगे।इसके साथ पार्टी ने तीन मीडिया रिपोर्ट्स को अटैच किया है। जिसमें एक गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय का बयान है कि पूरे असम में मौजूद डिटेंशन सेंटर में 28 अवैध प्रवासियों की मौत हो गई है।
कांग्रेस के प्रवक्ता आनंद शर्मा ने कहा, ‘डिटेंशन सेंटर भारत में मौजूद हैं। लोगों को वहां रखा जा रहा है। जिन लोगों ने कारगिल में हमारे लिए लड़ाई लड़ी उन्हें डिटेंशन सेंटर भेजा गया है। यहां तक कि अतंरराष्ट्रीय मीडिया ने डिटेंशन सेंटर पर फिल्म बनाई है और दिखाया है कि असम के पांच कमरों में 600 लोगों को रखा गया है। बच्चों को उनकी मां से अलग कर दिया गया है। परिवार टूट गया है। कांग्रेस ने मोदी के उस दावे को खारिज कर दिया कि विपक्ष लोगों को उकसा रही है। पार्टी का कहना है कि गृह मंत्री अमित शाह के संसद के दोनों सदनों में दिए बयान की वजह से देश में अनिश्चितता और भय का माहौल है। नागरिकता संशोधन विधेयक (अब कानून) पर लोकसभा ने चर्चा के दौरान शाह ने कहा था कि देशभर में एनआरसी को लागू किया जाएगा।
रविवार को मोदी ने कहा कि 2014 से सत्ता में आने के बाद उनकी सरकार ने कहीं भी एनआरसी को लेकर कोई बातचीत नहीं की। उन्होंने यह भी कहा कि असम में एनआरसी उच्चतम न्यायालय के आदेश पर लागू की गई थी। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने मोदी और शाह पर भारत के युवाओं के भविष्य को नष्ट करने और नफरत को छुपाने का आरोप लगाया है। उन्होंने ट्वीट कर कहा, ‘मोदी और शाह ने आपके भविष्य को नष्ट कर दिया है। वे नौकरियों की कमी और अर्थव्यवस्था को हुए नुकसान के बारे में आपके गुस्से का सामना नहीं कर सकते। यही कारण है कि वे हमारे प्रियजनों को बांट रहे हैं और नफरत के पीछे छिप रहे हैं।’

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