Mon. Mar 1st, 2021

विशेष संवाददाता

नई दिल्ली। नागरिकता संशोधन अधिनियम CAA 12 दिसंबर से देश में लागू हो गया। इससे पहले, 9 दिसंबर को लोकसभा और 11 दिसंबर को राज्यसभा से नागरिकता संशोधन बिल पास हुआ था।संसद में बहस के दौरान कांग्रेस समेत कई गैर-बीजेपी दलों ने इस बिल का जमकर विरोध किया और इसे धर्म के आधार पर भेदभाव करने वाला बताया। बीजेपी की अगुआई वाले एनडीए गठबंधन के सहयोगी जेडीयू ने संसद में नागरिकता बिल का समर्थन किया। दिलचस्प बात यह है कि पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर संसद के बाहर इस बिल का विरोध करते नजर आए। किशोर ने पहले दिन से ही पार्टी लाइन से अलग जाकर बयान दिए। इतना ही नहीं, प्रशांत किशोर इस कानून के खिलाफ विचार रखने वाले दलों, नेताओं को न केवल लामबंद कर रहे हैं, बल्कि इस कवायद में अहम सूत्रधार की भूमिका निभाते हुए भी नजर आ रहे हैं।
लोकसभा में नागरिकता संशोधन बिल 9 दिसंबर को पेश किया गया। सदन में दिनभर इस पर चर्चा हुई और आधी रात के वक्त यह बिल पास हो गया। एक तरफ लोकसभा में नीतीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड (JDU) बिल के समर्थन में वोटिंग कर रही थी, दूसरी तरफ पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर ट्वीट में कहा, ”धर्म के आधार पर नागरिकता के अधिकार में भेदभाव करने वाले CAB पर जेडीयू के समर्थन से निराश हूं। पार्टी लाइन के खिलाफ जाकर सार्वजनिक तौर पर नागरिकता कानून का विरोध करने वाले प्रशांत किशोर यहीं नहीं रुके। उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री और अपनी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार से इस मसले पर मुलाकात भी की। मुलाकात के बाद प्रशांत किशोर ने बताया कि नीतीश कुमार ने उन्हें भरोसा दिया है कि बिहार में NRC लागू नहीं होगा। बाद में नीतीश ने खुद भी ऐसा ही बयान दिया। नागरिकता कानून और NRC पर मचे बवाल के बीच नीतीश कुमार ने यह मांग भी उठा दी कि प्रधानमंत्री NDA की आपात बैठक बुलाएं। इस तरह प्रशांत किशोर के बागी रुख के बीच जेडीयू और नीतीश कुमार खुले तौर पर NRC को लेकर मोदी सरकार और बीजेपी के सामने आकर खड़े हो गए।
प्रशांत किशोर नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ गैर-बीजेपी शासित राज्य सरकारों से CAB और NRC को लागू नहीं करने की अपील भी करते रहे। बिल को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद प्रशांत किशोर ने 13 दिसंबर को अपने ट्वीट में लिखा, ‘ज्यूडिशरी के अलावा भारत की आत्मा को बचाने का जिम्मा अब 16 गैर-बीजेपी दलों के मुख्यमंत्रियों पर है। तीन मुख्यमंत्रियों (पंजाब/ केरल/ पश्चिम बंगाल) ने CAB और NRC को ना कह दिया है, अब बाकी लोगों का नंबर है कि वो अपना रुख स्पष्ट करें। इस बीच, दिल्ली की जामिया यूनिवर्सिटी के छात्रों ने आंदोलन छेड़ दिया और 15 दिसंबर की शाम यहां हिंसा हुई। इसके बाद जामिया के छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई का जमकर विरोध हुआ। कई नेता भी छात्रों के समर्थन में आ गए। कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने 20 दिसंबर को बयान जारी करके नागरिकता संशोधन कानून को भेदभावपूर्ण बताया। हालांकि, सोनिया गांधी के इस बयान से प्रशांत किशोर संतुष्ट नजर नहीं आए और उन्होंने कांग्रेस से सड़कों पर उतरने का आह्वान किया। प्रशांत किशोर की इस अपील का असर भी दिखाई दिया और कांग्रेस ने दिल्ली में राजघाट पर प्रदर्शन का ऐलान किया। हालांकि, 22 दिसंबर को कांग्रेस ने यह कार्यक्रम 23 दिसंबर तक के लिए टाल दिया। उधर, राजस्थान में कांग्रेस ने 22 दिसंबर को ही सड़कों पर उतरकर नागरिकता कानून का विरोध किया।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री बनर्जी ने खुलकर मोदी सरकार के इस फैसले का विरोध किया। 19 दिसंबर (शुक्रवार) को एक तरफ जहां दिल्ली, यूपी और कई राज्यों में लोग CAA और NRC के खिलाफ सड़कों पर आवाज उठा रहे थे, ममता बनर्जी कोलकाता में एक रैली आयोजित कर मोदी सरकार पर निशाना साध रही थीं। बता दें कि प्रशांत किशोर तृणमूल कांग्रेस को भी बतौर सलाहकार अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इस सबके बीच प्रशांत किशोर ने एक बार फिर नागरिकता कानून की लड़ाई को लीड करने का बीड़ा उठाया है। रविवार को एक ट्वीट में उन्होंने CAA और NRC पर दो सुझाव दिए। प्रशांत किशोर ने सीएए और एनआरसी को रोकने के लिए सभी प्लेटफार्म पर अपनी आवाज शांतिपूर्वक उठाकर विरोध जारी रखने और सभी 16 गैर-बीजेपी मुख्यमंत्रियों से अपने राज्यों में एनआरसी लागू न करने का आह्वान किया है।उधर, बिहार में प्रशांत किशोर की राजनीतिक विरोधी पार्टी आरजेडी के अलावा समाजवादी पार्टी, AIMIM और केरल में भी राजनीतिक दल सड़कों पर उतर चुके हैं। वहीं, बहुजन समाज पार्टी, आम आदमी पार्टी जैसे कई अन्य विपक्षी दल अपने बयानों से सरकार की मुखालफत कर रहे हैं। हाल ही में अरविंद केजरीवाल ने प्रशांत किशोर के उनसे जुड़ने का ऐलान किया था।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *