Wed. Apr 14th, 2021

राम मंदिर

नई दिल्ली ।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सह सरकार्यवाह भैयाजी जोशी ने राम मंदिर निर्माण के लिए केंद्र से सख्त लहजे में कानून लाने की मांग की। जोशी राम मंदिर पर दिल्ली के रामलीला मैदान में रविवार को विहिप की रैली में बोल रहे थे। उनके इस बयान ने केंद्र की मोदी सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। इस रैली में विहिप के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने भी मंदिर के मुद्दे पर सरकार को घेरा। कुमार ने तो रैली में यहां तक कहा कि अगर राम मंदिर के निर्माण का कानून संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में पास नहीं होता है तो 2019 के लोकसभा चुनाव में सरकार को लोगों का गुस्सा झेलना पड़ सकता है। संघ और विहिप के इस रुख ने एक तरह से केंद्र सरकार के लिए मुश्किल बढ़ाने का काम किया है। संघ का राम मंदिर पर अब और इंतजार नहीं वाले रुख ने विहिप को मुश्किल में डाल दिया है। ज्ञात हो कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा अयोध्या विवाद की सुनवाई जनवरी तक टालने के बाद भाजपा ने कहा था कि वह शीर्ष अदालत से इस विवाद के सुलझने का इंतजार करेंगे। भाजपा को डर है कि अगर वह इस मुद्दे पर कोई कानून लाती है तो विचाराधीन मामला बताकर कोर्ट इसे निरस्त भी कर सकती है।
संघ के भैयाजी जोशी ने रविवार को एक तरह से मोदी सरकार को अल्टिमेटम देते हुए कहा था कि राम मंदिर की भीख नहीं मांगी जा रही है, सरकार को कानून बनाना चाहिए। वैसे तो यह रैली विहिप की थी लेकिन संघ ने भी इसी बहाने अयोध्या विवाद पर मोदी सरकार को एक सख्त संदेश देने की कोशिश की। भैयाजी जोशी ने कहा, सत्ता में बैठे लोगों ने भी घोषणा की है कि मंदिर वहीं बनाएंगे, अब संकल्प पूरा करने का समय आ गया है। बिना झिझक के उन्हें इसे पूरा करना चाहिए। संघ सरकार्यवाहक ने कड़े शब्दों में कहा, ‘सत्ता में बैठे लोगों को जनभावनाओं का सम्मान करना चाहिए, हम भीख नहीं मांग रहे हैं।’
रंजन गोगोई और उनके सहयोगी जज राम मंदिर मामले की फिर से सुनवाई करेंगे। 8 जनवरी को संसद का शीतकालीन सत्र खत्म होगा और सरकार के पास इसके बाद अध्यादेश लाने का विकल्प होगा। विहिप की रामलीला मैदान में हुई रैली में आई भीड़ हाल में दिल्ली में आयोजित किसानों की रैली से 10 गुना ज्यादा थी। इससे पता चलता है कि अभी भी इस आंदोलन में काफी जान है।
विपिन/ईएमएस/ 10 दिसंबर 2018

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