Sun. Feb 28th, 2021

विशेष प्रतिनिधि

तिरुवनंतपुरम। नागरिकता संशोधन कानून को लेकर जहां देशभर में विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं वहीं विपक्ष भी भाजपा को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। नागरिकता कानून को लेकर कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने तिरुवनंतपुरम में सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत और भाजपा पर निशाना साधा। चिदंबरम ने कहा, अमित शाह को राज्यसभा और लोकसभा में हुए बहस को सुनना चाहिए, उन्होंने एक भी सवाल का जवाब नहीं दिया और अब वह इस पर बहस के लिए राहुल गांधी को चुनौती दे रहे हैं। इस कानून के बारे में सरकार द्वारा जो कुछ भी बताया जा रहा है, सब कुछ गलत है।
चिदंबरम ने कहा, डीजीपी और आर्मी जनरल को सरकार का समर्थन करने के लिए कहा जा रहा है, यह शर्म की बात है। हम जनरल रावत से अपील करते हैं, आप सेना के प्रमुख हैं, आप अपने पद की गरिमा का ध्यान रखें। यह सेना का काम नहीं है कि हम राजनेताओं को बताएं कि हमें क्या करना चाहिए, क्योंकि यह हमारा काम नहीं है कि हम आपको बताएं कि युद्ध कैसे लड़ा जाए।बता दें कि सेना प्रमुख बिपिन रावत ने गुरुवार को कहा था कि नेता जनता के बीच से उभरते हैं, अगर कोई नेता आगजनी और हिंसा भड़काने के लिए विश्वविद्यालयों और कॉलेज के छात्रों व जनता को उकसाता है तो वह नेतृत्व नहीं कर सकता। नेता वही है जो जनता को सही दिशा में लेकर जाए। जनरल बिपिन रावत ने कैंपस में छात्रों के हिंसक प्रदर्शन का नेतृत्व करने पर नाराजगी जाहिर की थी। रावत ने विश्वविद्यालयों के प्रदर्शन पर सवाल उठाए थे। उनके इस बयान पर अब राजनीतिक घमासान शुरू हो गया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह और एआईएमआईएम के हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने सेनाध्यक्ष पर निशाना साधते हुए ट्वीट किया था। दिग्विजय ने जहां सांप्रदायिक आधार पर हिंसा को लेकर सवाल पूछा तो वहीं ओवैसी ने उन्हें अपने कार्यक्षेत्र तक सीमित रहने की सलाह दी।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने सेनाध्यक्ष के बयान पर पलटवार करते हुए उनसे सवाल पूछा था। उन्होंने कहा था, ‘नेता वे नहीं है जो लोगों को हथियार उठाने के लिए प्रेरित करते हैं। सेनाध्यक्ष ने नागरिकता प्रदर्शन को लेकर यह कहा। मैं जनरल साहेब की बात से इत्तेफाक रखता हूं लेकिन नेता वे भी नहीं होते जो अपने अनुयायियों को सांप्रदायिक आधार पर नरसंहार के लिए भड़काएं। क्या आप मेरी बात से सहमत हैं जनरल साहब”एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने सोनाध्यक्ष को नसीहत दी थी। उन्होंने ट्वीट कर कहा था, ‘अपने कार्यालय के प्रभाव क्षेत्र को भी समझ लेना नेतृत्व है। यह (नेतृत्व) नागरिक की सर्वोच्चता को समझने के बारे में और जिस संस्था के प्रमुख आप हैं उसकी गरिमा को ठीक तरह से जानना भी है। उन्होंने कहा था, ‘उनका यह बयान मोदी सरकार को निर्बल करता है। हमारे प्रधानमंत्री ने अपनी वेबसाइट पर लिखा कि एक छात्र के तौर पर आपातकाल के दौरान उन्होंने प्रदर्शन में हिस्सा लिया था। तो सेनाध्यक्ष के बयान के अनुसार यह भी गलत है।

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