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विशेष संवाददाता

नई दिल्ली। बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी पर पलटवार करते हुए पर जमकर निशाना साधा है। मायावती ने कांग्रेस की ‘भारत बचाओ, संविधान बचाओ’ रैली पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस को सत्ता में रहते वक्त जनता के हितों की याद क्यों नहीं आई। उन्होंने कहा कि दूसरों पर चिंता व्यक्त करने के बजाए कांग्रेस स्वयं अपनी स्थिति पर आत्म चिंतन करती तो बेहतर होता। मायावती ने ट्वीट कर कहा, ‘कांग्रेस आज अपनी पार्टी के स्थापना दिवस को भारत बचाओ, संविधान बचाओ के रूप में मना रही है। इस मौके पर दूसरों पर चिंता व्यक्त करने के बजाए कांग्रेस स्वयं अपनी स्थिति पर आत्म-चिंतन करती, तो यह बेहतर होता, जिससे निकलने के लिए उसे अब किस्म-किस्म की नाटकबाजी करनी पड़ रही है।
दूसरे ट्वीट में मायावती ने लिखा, ‘भारत बचाओ, संविधान बचाओ की याद कांग्रेस को तब क्यों नहीं आई जब वह सत्ता में रहकर जनहित की घोर अनदेखी कर रही थी, जिसमें दलितों, पिछड़ों व मुस्लिमों को भी उनका संवैधानिक हक नहीं मिल पा रहा था, जिसके कारण ही आज बीजेपी सत्ता में बनी हुई है, तभी फिर BSP को भी बनाने की जरूरत पड़ी। प्रियंका ने कांग्रेस के 135वें स्थापना दिवस पर यहां आयोजित एक समारोह को संबोधित करते हुए कहा, ‘एक दमनकारी विचारधारा है, आज भी हम उसी से लड़ रहे हैं, जिससे हम आजादी के समय लड़े थे। जिन्होंने आजादी के संघर्ष में कोई योगदान नहीं दिया वे देशभक्त बनकर देशभर में भय फैलाना चाहते हैं। देशभक्ति के नाम पर लोगों को डराया जा रहा है।उन्होंने कहा, ‘आज देश में वही शक्तियां सरकार चला रही हैं, जिनसे हमारी ऐतिहासिक टक्कर रही है। जब-जब देश में भय का माहौल फैलाया जाता है तब-तब कांग्रेस का कार्यकर्ता खड़ा होता है। हम अहिंसा की विचारधारा से उपजे हैं। इस समय देश देश संकट में है, आपने देखा कि पिछले दिनों में किस तरह की अराजकता फैली। संविधान के खिलाफ बने कानून के विरोध में देश के कोने-कोने में युवा आवाज उठा रहे हैं।
प्रियंका ने कहा, ‘हमारे दिल में अहिंसा और करुणा है। कायर की पहचान हिंसा है। झूठ से देश ऊब चुका है। कायरता को देश पहचान रहा है। आवाज उठाने पर बच्चों को मार रहे हैं। पहले देश में एनआरसी की बात फैलाई, अब कह रहे हैं कि एनआरसी की चर्चा ही नहीं हुई। उन्होंने कहा, ‘दूसरी पार्टियां सरकार से डर रही हैं, वे कुछ नहीं कह रही हैं। कांग्रेस को संघर्ष की चुनौती स्वीकार है। दमनकारी विचारधारा से टक्कर है। कार्यकर्ताओं के दिल में भय और हिंसा नहीं। उन्होंने कोई बलिदान नहीं दिया है।

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