Mon. Apr 12th, 2021

विशेष संवाददाता

नई दिल्ली। चुनाव आयोग ने दिल्ली में चुनावी जंग का ऐलान कर दिया है. पिछले विधानसभा चुनाव में यहां 71 पार्टियां मैदान में थीं. 195 निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे थे, लेकिन कोई भी जमानत सुरक्षित नहीं रख पाया था. क्योंकि सारा वोट तो आम आदमी पार्टी को मिला था. पार्टी को रिकॉर्ड 54.34 फीसदी वोट मिले थे. इस बार भी चुनाव लड़ने वाली पार्टियों की बाढ़ आने वाली है लेकिन असली जंग तो आम आदमी पार्टी , बीजेपी  और कांग्रेस के बीच है. चुनाव को लेकर ‘आप’ और बीजेपी के बीच जोरदार सियासी जंग जारी है. हवा, पानी और सीएए को लेकर दोनों एक दूसरे पर वार कर रहे हैं. आईए समझते हैं कि 2020 के चुनाव में आखिर इनमें से कौन किसके लिए खतरा बन सकता है.
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ‘आप’ के सामने सबसे कड़े मुकाबले में बीजेपी दिखाई दे रही है. लेकिन यहां सत्तारूढ़ दल को बीजेपी से उतना खतरा नहीं है जितना कांग्रेस से. इसके लिए हमें 2015 के चुनाव परिणाम का विश्लेषण करना होगा. आम आदमी पार्टी ने जो वोट हासिल किए थे वो बीजेपी के नहीं बल्कि कांग्रेस के हुआ करते थे. कांग्रेस का ही वोट इस नई नवेली पार्टी की ओर शिफ्ट हो गया.
दिल्ली में कांग्रेस के पारंपरिक वोटरों ने अरविंद केजरीवाल  एंड टीम पर भरोसा जताया था. लेकिन 2020 में कांग्रेस पहले जितनी कमजोर नहीं दिखाई दे रही. उसने अपनी टीम में सुभाष चोपड़ा (पंजाबी) और कीर्ति आजाद (बिहारी-ब्राह्मण) को जगह देकर जातीय समीकरण से आम आदमी पार्टी को उलझाने की कोशिश शुरू कर दी है. इसलिए कांग्रेस का यह वोटबैंक अगर उसकी तरफ वापस आता है तो नुकसान आम आदमी पार्टी को होगा.

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