Thu. Apr 22nd, 2021

विशेष प्रतिनिधि

नई दिल्ली। दिल्‍ली हाई कोर्ट ने ओखला-कालिंदीकुंज रोड ब्‍लॉक मामले (शाहीन बाग मामला) से जुड़ी याचिका का मंगलवार को निस्‍तारण कर दिया। कोर्ट ने दिल्‍ली पुलिस को कानून के तहत और आम लोगों के हित में काम करने का निर्देश दिया है। मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि सरकार को जनहित को ध्यान में रखकर काम करना चाहिए। मालूम हो कि इससे पहले इसी मामले पर दाखिल एक अर्जी को कोर्ट ने खारिज कर दिया था। इसके बाद कोर्ट में दूसरी याचिका दायर की गई थी। बता दें कि CAA और NRC के खिलाफ शाहीन बाग इलाके में प्रदर्शन चल रहा है। इसे देखते हुए दिल्‍ली पुलिस (ट्रैफिक) ने ओखला-कालिंदीकुंज रोड को बंद कर दिया है। यह रूट एक महीने से भी ज्‍यादा वक्‍त से यातायात के लिए ब्‍लॉक है। अमित साहनी की याचिका पर हाई कोर्ट ने मंगलवार को सुनवाई की थी।दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करने वाले अमित साहनी ने मांग करते हुए कहा है कि प्रदर्शनकारी ओखला में शाहीन बाग की उस सड़क पर बैठे हुए हैं। जो आगे चलकर दिल्ली-आगरा हाइवे से जुड़ जाती है। इसी सड़क पर अपोलो अस्पताल है। सुबह से शाम तक ही नहीं रातभर इस सड़क पर खासा ट्रैफिक भी रहता है। लिहाजा इस सब को देखते हुए सड़क खुलवाने के आदेश जारी किए जाएं।
गौरतलब रहे कि इससे पहले भी तुषार सचदेव और रमन कालरा ने दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल की थी। इसमें ओखला-शाहीन बाग रोड को जल्द से जल्द खुलवाने की मांग की गई थी। इस संबंध में कुछ तर्क भी दिए गए थे, लेकिन बीते शुक्रवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान इस जनहित याचिका को खारिज कर दिया था। दिल्ली के शाहीन बाग इलाके में जामिया हिंसा मामले के बाद से लगातार विरोध प्रदर्शन जारी है। कड़ाके की सदी और बारिश के मौसम में भी प्रदर्शनकारी सड़क पर डटे हुए हैं। शाहीन बाग में यह धरना 24 घंटे चालू रहता है। धरने में बड़ी संख्या में महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल हैं। सड़क पर ही सभी का खाना-पीना और चाय-पानी चलता रहता है। छोटे बच्चों को गर्म दूध पीने के लिए दिया जाता है।

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