Mon. Apr 12th, 2021

विशेष संवाददाता

सूरत । गुजरात के दौरे पहुंचे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को 51वीं के-9 व्रज-टी तोप को सूरत के हजीरा स्थित लार्सन ऐंड टुब्रो बख्तरबंद प्रणाली परिसर में हरी झंडी दिखाई। रक्षा मंत्री सिंह तोप के ऊपर सवार भी हुए और इसे हजीरा परिसर के आसपास चलाया। लार्सन ऐंड टुब्रो ने रक्षा मंत्री को के-9 वज्र-टी तोप की मारक क्षमता के विभिन्न प्रदर्शन भी दिखाए। कार्यक्रम के दौरान राजनाथ सिंह ने तोप के ऊपर स्‍वास्तिक का निशान बनाया और नारियल फोड़ा। रक्षा मंत्री ने तोप के ऊपर स्‍वास्तिक का न‍िशान भी बनाया। बता दें कि इस तोप का वजन 50 टन है और यह 47 किलोग्राम के गोले 43 किलोमीटर की दूरी तक दाग सकती है। यह स्वचालित तोप शून्य त्रिज्या पर भी घूम सकती है। रक्षा मंत्रालय ने केंद्र की ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत भारतीय सेना के लिए एल ऐंड टी कंपनी को 2017 में के9 वज्र-टी 155मिमी/52 कैलीबर तोपों की 100 यूनिट आपूर्ति के वास्ते 4,500 करोड़ रुपये का करार किया था।
मंत्रालय द्वारा किसी निजी कंपनी को दिया गया यह सबसे बड़ा सौदा है जिसके तहत 42 महीने में इन तोपों की 100 यूनिट आपूर्ति की जानी हैं। तोप पर रक्षा मंत्री ने तिलक लगाया और कुमकुम से ‘स्वास्तिक’ का निशान बनाया। पूजा के दौरान उन्होंने तोप पर फूल भी चढ़ाए और नारियल भी फोड़ा। एलएंडटी साउथ कोरिया की हान्वा टेकविन के साथ मिलकर गुजरात के हजीरा प्लांट में यह तोप बना रही है। इन ‘दागो और भागो’ स्टाइल वाली तोपों को पश्चिमी सीमा पर तैनात किए जाएगा, जिससे मोबाइल आर्टिलरी गन के मामले में पाकिस्तानी युद्ध क्षेत्र में बढ़त हासिल की जा सके। 2009 में अमेरिका ने अफगानिस्तान सीमा पर युद्ध के दौरान सहायता करने के लिए पाकिस्तान को 115 एम 109A5 तोपें दी थीं। वज्र सीमा पर पाकिस्तान की इन तोपों का मुकाबला करेगी। वज्र को भले ही साउथ कोरिया की कंपनी के साथ मिलकर बनाया गया है, लेकिन इसमें 50 पर्सेंट से ज्यादा सामग्री देसी है। सेना काफी बड़ी संख्या में इन तोपों का ऑर्डर दे सकती है। इसके अलावा इसके एक्सपोर्ट के विकल्प पर भी विचार किया जा सकता है। यह ऑर्डर इसलिए भी खास है क्योंकि इसमें किसी भी भारतीय कंपनी को कोई विशेष छूट नहीं दी गई थी, इसके बावजूद एलएंडटी ने एक ग्लोबल कॉम्पिटिशन में रूसी कंपनी के खिलाफ बोली लगा इसे जीता था।

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