पटना । दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020  में इसी साल होने वाले बिहार के चुनाव का रिहर्सल  भी हो रहा है। एनडीए  के तीनों घटक दल सांकेतिक तौर पर ही सही एकजुटता का परिचय दे रहे हैं, जबकि महागठबंधन  के दलों में से एक हिंदुस्‍तानी अवामी मोर्चा  राज्य में हुए उपचुनाव की तरह दिल्ली में भी अपनी डफली अलग बजा रहा है। हम के दो उम्मीदवार मैदान में हैं। पटपटगंज और नई दिल्ली क्षेत्र में हम ने उम्मीदवार उतारा है।

इन सीटों पर कांग्रेस के भी उम्मीदवार हैं। एनडीए से लेकर महागठबंधन तक दिल्‍ली में ताकत दिखा रही है, ताकि इसका प्रभाव बिहार विधानसभा चुनाव  में भी पड़े। विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव अपने चार उम्मीदवारों के अलावा कांग्रेस के उम्मीदवारों का भी प्रचार कर रहे हैं। हम के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी  को राजद-कांग्रेस वाले न पूछ रहे हैं, न वह खुद उनके क्षेत्रों में जा रहे हैं। संभावना है कि मांझी का यह रूख बिहार विधानसभा चुनाव तक जारी रहेगा।बिहार विधानसभा की पांच सीटों पर उप चुनाव हुआ था।

राजद-कांग्रेस में तालमेल था। मांझी के उम्मीदवार नाथनगर में थे। महागठबंधन का एक अन्य घटक विकासशील इंसान पार्टी  ने भी उप चुनाव में अपना उम्मीदवार दिया था। गनीमत है कि यह पार्टी दिल्ली विधानसभा चुनाव में शामिल नहीं है।  एनडीए की एकजुटता का एक और संदेश दिल्ली से मिल रहा है।

गृह मंत्री अमित शाह  16 जनवरी को वैशाली आए थे। अपने भाषण में उन्होंने एनडीए की एकजुटता की चर्चा के दौरान सिर्फ भाजपा-जदयू का नाम लिया था। इससे लोजपा कार्यकर्ताओं में बेचैनी बढ़ गई थी। दिल्ली में लोजपा को एक सीट दी गई और सभा मंच पर अमित शाह और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार  ने लोजपा अध्यक्ष चिराग पासवान  को खास महत्व दिया। लोजपा कार्यकर्ताओं ने इसे एकजुटता के संदेश के तौर पर लिया। मान लिया कि लोकसभा चुनाव की तरह बिहार विधानसभा के चुनाव में भी लोजपा को इज्जत मिलेगी।