Fri. Apr 23rd, 2021
संवाददाता
नई दिल्ली . सुप्रीम कोर्ट ने बीते दिनों एक मामले में प्रमोशन में आरक्षण  पर टिप्पणी की, जिसके बाद राजनीतिक पार्टियों में इस मुद्दे पर बयानबाजी जारी है. सरकारी नौकरियों में प्रमोशन में आरक्षण का मुद्दा सोमवार को संसद में भी गूंजा.  विपक्षी दलों ने सुप्रीम कोर्ट की व्यवस्था का मुद्दा उठाते हुए वर्तमान आरक्षण व्यवस्था को नुकसान पहुंचाए जाने को लेकर आशंका जताई. विपक्ष ने सरकार से इस मुद्दे पर अपना स्टैंड क्लियर करने की मांग रखी.
इस पर सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत ने राज्यसभा में कहा सर्वोच्च न्यायालय के प्रमोशन में आरक्षण मामले पर फैसले में न कभी भारत सरकार को पक्षकार बनाया गया और न शपथ पत्र मांगा गया. मामला 5 सितंबर 2012 को उत्तराखंड की कांग्रेस सरकार द्वारा लिए निर्णय पर आधारित है. भारत सरकार इस पर उच्च स्तरीय विचार कर समुचित कदम उठाएगी.उच्च सदन की बैठक शुरू होने पर जब विभिन्न विपक्षी दलों के सदस्यों ने पदोन्नति में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के लोगों को आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट की व्यवस्था का मुद्दा उठाया.
विपक्षी दलों ने वर्तमान आरक्षण व्यवस्था को नुकसान पहुंचाए जाने को लेकर आशंका जताई. ऐसे में सभापति एम वेंकैया नायडू ने कहा कि न्यायालय की व्यवस्था पर किसी तरह की टिप्पणी नहीं की जा सकती. हालांकि, सभापति ने यह भी कहा कि सदस्य बहुत संक्षेप में अपनी बात रख सकते हैं.आसन की अनुमति से सदन में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद, माकपा सदस्य के के रागेश, भाकपा के विनय विश्वम और बसपा के सतीश चंद्र मिश्र ने अनुसूचित जाति जनजाति के लोगों के लिए पदोन्नति में आरक्षण व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दिया.
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि- मैंने सोचा था कि वह कहेंगे कि आज सरकार एससी के पास जाएगी और इस फैसले को उलट देगी. यदि सुप्रीम कोर्ट ने इसे उलट नहीं किया है तो वे इसे निष्प्रभावी बनाने के लिए सदन में एक विधेयक लाएंगे. यह कोई जवाब नहीं है कि सरकार ने उच्चतम स्तर पर इस पर विचार किया है.उन्होंने कहा यह भारत की एक चौथाई आबादी के भविष्य से जुड़ा एक गंभीर मामला है. मैं केंद्र से एक कैबिनेट बैठक आयोजित करने का अनुरोध करता हूं और कहता हूं कि वे सर्वोच्च न्यायालय में जाएं और उनसे इसकी समीक्षा करने और इसे वापस लेने के लिए कहें. अगर ऐसा नहीं होता है तो वे इसे निष्प्रभावी बनाने के लिए एक विधेयक लाएंगे.
लोकसभा में भी हंगामा – प्रमोशन में आरक्षण के मुद्दे पर आज लोकसभा में हंगामा हुआ. लोक जनशक्ति पार्टी के प्रमुख चिराग पासवान ने यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि उनकी पार्टी सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले से खुश नहीं है. उन्होंने केंद्र सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया. वहीं, संसदीय कार्य मंत्री प्रहलाद जोशी ने कहा कि यह सुप्रीम कोर्ट का निर्णय है. भारत सरकार का इससे कोई लेना-देना नहीं है.

क्यों उठ रहा आरक्षण का मुद्दा? –  दरअसल, बीते दिनों सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए सरकारी नौकरियों में आरक्षण पर टिप्पणी की थी. कोर्ट ने कहा था कि नौकरियों में आरक्षण का दावा करना मौलिक अधिकार नहीं है. ऐसे में कोई अदालत राज्य सरकारों को अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोगों को आरक्षण देने का निर्देश नहीं जारी कर सकती है. आरक्षण देने का अधिकार और दायित्व राज्य सरकारों के विवेक पर निर्भर है. अदालत के इस टिप्पणी के बाद राजनीतिक पार्टियों केंद्र सरकार को घेरने में जुटी है.

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