Thu. Apr 22nd, 2021

संवाददाता
नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक बार फिर शाहीन बाग में नागरिकता संशोधन कानून को लेकर पिछले दो महीने से ज्यादा दिनों से चल रहे धरना-प्रदर्शन को लेकर सुनवाई हुई, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल सका। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि फिलहाल इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करेंगे। हालांकि कोर्ट ने एक बार फिर दोहराया कि सार्वजनिक जगहों पर प्रर्दशन करना वाजिब नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 23 मार्च की तारीख तय की है। सुनवाई को दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि दिल्ली हाईकोर्ट ने हिंसा से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई की है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह हिंसा से जुड़ी याचिकाओं पर विचार करके शाहीन बाग प्रदर्शनों के संबंध में दायर की गई याचिकाओं के दायरे में विस्तार नहीं करेगा।

कोर्ट ने दिल्ली में हिंसा की घटनाओं को दुर्भाग्यपूर्ण बताया, लेकिन उससे संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई से इनकार कर दिया। शीर्ष कोर्ट ने कहा कि वार्ताकारों ने पूरी कोशिश की, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारे पास सिर्फ एक मामला है, शाहीन बाग में रास्ता खुलवाने को लेकर, हमने वार्ताकार भेजे थे, जिन्होंने हमे रिपोर्ट सौंपी है। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हिंसा से संबंधित याचिकाओं का निस्तारण करते हुए कहा कि हाईकोर्ट इस मामले पर विचार करेगा। न्यायालय ने कहा कि माहौल शांतिपूर्ण रहे यह सुनिश्चित करना कानून लागू करने वाले प्रशासन का काम है। कोर्ट ने कहा कि हिंसा बढ़ी है इसलिए विधि-व्यवस्था बहाल करना पहली बड़ी जिम्मेदारी है। हाईकोर्ट में इस मामले पर 12.30 बजे सुनवाई होनी है, उसके बाद होली के बाद हम सुनवाई करेंगे। इससे पहले सोमवार को सुनवाई हुई थी। उस दिन कोर्ट द्वारा नियुक्त दोनों वार्ताकारों संजय हेगड़े और साधना रामचंद्रन ने अपनी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में दाखिल की थी।

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