Thu. Apr 22nd, 2021

संवाददाता

नई दिल्ली। भारतीय वायु सेना प्रमुख एयर मार्शल आर के एस भदौरिया का मानना है कि राफेल जेट सेना की जरूरत के लिए काफी नहीं होगा। उन्होंने स्वदेशी प्लेटफॉर्म विकसित करने पर जोर दिया। सेंटर फॉर एयर पावर स्टडीज की तरफ से आयोजित ‘एयर पावर इज नो वार नो पीस सिनेरियो’ पर आयोजित सेमिनार में वायु सेना प्रमुख भदौरिया ने कहा कि सब-कन्वेंशनल डोमेन में एयर फोर्स का इस्तेमाल ‘टैबू’ माना जाता था और बालाकोट स्ट्राइक से इसमें मौलिक बदलाव लाया है। स्वदेशी हथियारों के निर्माण की जरूरत पर जोर देते हुए भदौरिया ने कहा कि अगर अगले हवाई भिड़त में वायु सेना स्वदेश निर्मित हथियार का इस्तेमाल हो तो यह गेम चेंजर साबित होगा। उन्होंने कहा, ’36 राफेल जेट वायु सेना की जरूरत को पूरा नहीं कर सकते। हमें बेहतर वायु शक्ति को दिखाने के लिए में सुखोई 30 और मिग 29 जैसे एयरक्राफ्ट के लिए स्वदेशी अस्त्र मिसाइल के इस्तेमाल को योग्य बनना होगा।’

उन्होंने कहा ‘ मिटिओर मिसाइल से लैस 36 राफेल जेट को शामिल करने से वायु सेना की क्षमता अवश्य बढ़ेगी। लेकिन हमें और समाधान की आवश्यकता है। हम वायु सेना की जरूरत के लिए सिर्फ राफेल जेट के मिटिओर क्लास पर निर्भर नहीं रह सकते।’ भदौरिया ने कहा, ‘हवाई लड़ाई में विशेषकर जब बेहद अंदरूनी इलाके में यह हो रहा हो, तो हथियार में धार जरूरी है। एक बार हमें यह धार मिल जाए, तो जरूरी है कि धार खत्म न हो।’ बालाकोट स्ट्राइक के फैसले के लिए सरकार की तारीफ करते हुए भदौरिया ने कहा कि यह एक बोल्ड डिसिजन था। उन्होंने कहा, ‘वायु सेना ने सफलतापूर्वक लक्ष्य को भेदा। पाकिस्तान वायु सेना ने 30 घंटे बाद जवाब दिया। वायु सेना ने सुनिश्चित किया कि पाक सेना किसी लक्ष्य पर निशाना न साध पाए। वे जल्द मुक्त होने की जल्दी में थे। वे अपने लोगों को दिखाने के लिए ऐसा कर रहे थे।’ उन्होंने कहा, ‘जब हम ऐसे लक्ष्य को निशाना बनाने की सोचते हैं। हमारा मनोबल उच्च होना चाहिए। कॉलेटेरल डैमेज कम हो इसके लिए पहाड़ी इलाके के लक्ष्य को चुना गया। नहीं तो उन्हें दोगुने एयरक्राफ्ट इस्तेमाल करने पड़ते या दूसरे उपाय करने पड़ते।’

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