Fri. Apr 23rd, 2021

नई दिल्ली। आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर सख्ती से आगे बढ़ते हुए सरकार ने 18 और व्यक्तियों को आज गैर कानूनी गतिविधि निवारण अधिनियम 1967 के तहत आतंकवादी घोषित किया है। इसमें कई बड़े आतंकियों के नाम हैं। गृह मंत्रालय ने आज यहां एक बयान जारी कर कहा कि 18 और व्यक्तियों को गैर कानूनी गतिविधि अधिनियम के तहत आतंकवादी घोषित कर इनके नाम इस अधिनियम की चौथी अनुसूची में शामिल करने का निर्णय लिया है। संशोधित गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम के तहत ‘व्यक्तिगत आतंकवादी’ घोषित किए जाने वालों की संपत्तियों को जब्त करने की अनुमति देता है। इसमें पाकिस्तान जासूस एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस का साजिद मीर है, जिसने कराची में एक नियंत्रण कक्ष से 26/11 मुंबई हमले की निगरानी की थी, हिजबुल मुजाहिदीन एचएम के प्रमुख सैयद सलाहुद्दीन, लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख हाफिज सईद के बहनोई अब्दुर रहमान मक्की, जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मौलाना मसूद अजहर के भाई अब्दुल रऊफ असगर, आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन के संस्थापक भतीजे रियाद भाई इकबाल भटकल, साथ ही अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के दाहिने हाथ छोटा शकील, और दो अन्य डी कंपनी टाइगर मेमन और जावेद चिकना शामिल हैं। जिन व्यक्तियों को आतंकवादी घोषित किया गया है उनमें से अधिकतर पाकिस्तान में सक्रिय हैं। इससे पहले भी तेरह व्यक्तियों को आतंकवादी घोषित किया जा चुका है । इस तरह अब तक सरकार ने कुल 31 व्यक्तियों को आतंकवादी घोषित किया है।

सरकार ने पिछले वर्ष अगस्त में इस अधिनियम में संशोधन कर यह प्रावधान किया था कि आतंकवाद की गतिविधियों में लिप्त व्यक्तियों को आतंकवादी घोषित किया जायेगा। इस संशोधन से पहले इस तरह की गतिविधियों में शामिल संगठनों को ही आतंकवादी संगठन घोषित किया जा सकता था। बता दें कि इधर, तुर्की सहित कुछ देशों की मदद से एफएटीएफ की ग्रे सूची से बाहर निकलने की पाकिस्तान की कोशिश कामयाब नहीं हुई। व्यापक चर्चा के बाद एफएटीएफ ने ऐलान किया कि पाकिस्तान ग्रे सूची में बरकरार रहेगा। उसे आतंक पर कार्रवाई के लिए जरूरी मानकों पर खरा उतरने के लिए फरवरी 2021 तक का समय दिया गया है। किए गए बयान में एफएटीफ ने बताया कि पाकिस्तानी सरकार आतंकवाद के खिलाफ 27 सूत्रीय एजेंडे को पूरा करने में विफल रही है। एफएटीएफ ने यह भी कहा कि पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधित आतंकवादियों के खिलाफ भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है।

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