Mon. Apr 12th, 2021

नई दिल्ली। सरकार की आलोचना के लिए आम नागरिकों को परेशान नहीं किया जा सकता है सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की और कोलकाता पुलिस को फटकार लगाई, जिसमें दिल्ली की एक महिला को कोलकाता पुलिस ने आपत्तिजनक फेसबुक पोस्ट के लिए समन भेजा था। दरअसल, महिला ने कोलकाता के एक भीड़भाड़ वाले राजा बाजार क्षेत्र के दृश्य को साझा किया था और इन तस्वीरों के जरिए कोरोना लॉकडाउन को लागू करने के लिए ममता बनर्जी सरकार की गंभीरता पर सवाल उठाया था। कथित फेसबुक पोस्ट को एफआईआर के लिए अनुपयुक्त मानते हुए सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और इंदिरा बनर्जी की पीठ ने कहा कि अगर राज्यों की पुलिस इस तरह से आम लोगों को समन जारी करने लग जाएगी, तो यह एक खतरनाक ट्रेंड हो जाएगा और ऐसे में कोर्ट को आगे बढ़कर अभिव्यक्ति की आजादी के संवैधानिक अधिकार की रक्षा करनी होगी, जो कि संविधान के आर्टिकल 19(1)A के तहत हर नागरिक को मिला हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की और कहा कि ऐसा लग रहा है जैसे आप उस महिला को सबक सिखाना चाहते हैं कि सरकार के खिलाफ लिखने की हिम्मत कैसे हुई। बेंच ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति सरकार के खिलाफ टिप्पणी करता है और आप राज्य कहते हैं कि वो कोलकाता, चंडीगढ़ या मणिपुर में उपस्थित हो और फिर आप कहेंगे कि हम तुम्हें सबक सिखाएंगे। ये एक खतरनाक ट्रेंड है। इस देश को आजाद बने रहने दीजिए। सुप्रीम कोर्ट ने 29 सितंबर के हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें याचिकाकर्ता को जांच में सहयोग करने के लिए कोलकाता में उपस्थित होने को कहा था। जांच अधिकारी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से याचिकाकर्ता से पूछताछ करने या यहां तक कि दिल्ली में जाकर तथ्यों की छानबीन करने की स्वतंत्रता दी गई थी। 29 साल की रोशनी बिस्वास की ओर से सप्रीम कोर्ट में सीनियर वकील महेश जेठमलानी कहा, ‘मेरे मुवक्किल से संज्ञेय अपराध कहां हुआ है? साथ ही मेरे मुवक्किल ने विवादित पोस्ट्स से किसी भी तरह के जुड़ाव से इनकार किया है। वो रोशनी को कोलकाता इसलिए बुलाना चाहते हैं क्योंकि धमकाया जा सके। याचिकाकर्ता को परेशान किए जाने के किसी भी प्रयास से इनकार करते हुए पश्चिम बंगाल सरकार के वकील आर. बसंत ने कहा कि आखिर सरकार रोशनी के खिलाफ क्यों होगी। उन्होंने कहा कि धारा 41 एक कार्वयवाही के में कोर्ट को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि रोशनी हाईकोर्ट के सामने स्वीकार कर चुकी हैं कि वो लॉकडाउन के बाद पुलिस के सामने उपस्थित होंगी। हम उन्हें बस कुछ सवाल पूछने के लिए बुलाना चाहते हैं, परेशान करने के लिए नहीं। इस पर पीठ ने टिप्पणी की, ‘अगर किसी ने गलत किया है, तो हम नागरिकों को बताने के लिए इस देश में पहले संस्थान होंगे कि उन्हें कानून का जवाब देना चाहिए, मगर इसके लिए नहीं। हमें यह सुनिश्चित करने के लिए यहां रहना होगा कि आम नागरिकों को इस तरह परेशान न किया जाए हमारे पास एक राज्य से दूसरे राज्य में बुलाए जाने वाले लोगों के खिलाफ मजबूत आरक्षण है क्योंकि उन्होंने सरकार की आलोचना की है। अदालत ने याचिका पर बंगाल सरकार को नोटिस जारी किया और जवाब देने के लिए बंगाल सरकार को चार सप्ताह का समय दिया। इस बीच, इसने हाईकोर्ट को वर्तमान आदेश से प्रभावित हुए बिना एफआईआर को रद्द करने की याचिका पर आगे की सुनवाई करने का निर्देश दिया है।

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