Sat. Feb 27th, 2021


आईपीएस लिपि सिंह पढ़ नहीं सकीं मुंगेर में विसर्जन और विदायी परंपरा की ब्रम्ह् लिपि
सैकड़ों साल से चली आ रही है बड़ी दूर्गा को कांधे पर ही विसर्जन की अनोखी परंपरा

परंपराओं की अज्ञानता ने जला दिया मुंगेर, यह बात को सिरे से खारिज नहीं किया जा सकता है। एक आईपीएस अधिकारी को विधि व्यवस्था के नियंत्रण के लिए इतिहास, पुरातत्व , धर्मं और अध्यात्म के वैचारिक खण्डहर की भी खोह लेनी पड़ती हैं। भारत गणराज्य के मूल स्वर और आत्मा में धार्मिक आख्यान का वर्णन है। कुछ परंपरा भारत की मूल आत्मा का स्वर भी है। अपराधियों की धर पकड़ की साथ इस बात को भी याद रखा जाना चाहिए की हर आम आदमी अपराधी नहीं होता। कभी कभी खाकी वर्दी पॉवर के साथ अहंकार भी दे देती है, अहंकारवश मानव चेतनाविहीन हो जाता है।
मुंगेर की घटना इसका ज्वलंत उदाहरण है। विसर्जन के वक्त बड़ी दुर्गा मां 32 कहार और आम लोगों के कांधे पर थीं। बड़ी दुर्गा की मूर्ति विसर्जन मूर्तियों के मध्य में थी उसके आगे पीछे की मूर्तियां कुछ ट्रक और ट्रैक्टर पर थीं। जल्दी-जल्दी मूर्तियों को विसर्जन कराने को लेकर पुलिस से नोंकझोंक शुरू हुई तो लोगों ने विरोध करना शुरू कर दिया। मूर्ति विसर्जन करने वाले लोगों का कहना था कि जब तक बड़ी मां दुर्गा की विदायी नहीं होगी तब तक दूसरी अन्य मूर्तियां कतई विर्सजित नहीं हो सकती है। विसर्जन के दौरान बड़ी दुर्गा की मूर्ति कतार में बिल्कुल बींचो-बीच थी। लोगों ने पुलिसबल से कहा कि सैकड़ों साल की हमारी यही परंपरा है। मुंगेर की पुलिस ने आम लोगों को उसे परंपरा नहीं सिखाने की बात गाली-गलौच के साथ कर दी। बात यहीं बिगड़ गयी। मौके पर मौजुद पुलिस के अधिकारियों ने एसएसपी लिपि सिंह को हालात के बिगड़ने की बावत बताया। लिपि सिंह और मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों के बीच क्या-क्या बातें हुई इस बावत कोई जानकारी नहीं है पर मौके पर मौजुद पुलिसकर्मी एक्शन मोड में आ गये। यस मैडम -यस मैडम के थोड़ी ही देर बाद विसर्जन और विदायी का इमोशनल सीन, एक्शन और खून-खराबे से में बदल गई। मौके पर मौजूद स्थानीय पुलिस ने न केवल आम लोगों को बेरहमी से खदेड़-खदेड़ कर पीटा बल्कि लगभग 13 राउंड गोलियां चला दी। लाठी चार्ज व पुलिसिया फायरिंग के बीच बड़ी दुर्गा को कांधे दे रहे लोग टस से मस नहीं हुए और वहीं माता की मूर्ति को रख घेरा बनाकर बैठ गये। बौखलाये पुलिस के जवानों ने धार्मिक परंपरा का पालन कर रहे बेगुनाह लोगों को भी नहीं बख्शा और उन्हे चारों ओर से घेरकर मारा। मां के विर्सजन के विहंगम दृश्य को यादगार यादगार बनाने के लिये लोग बाग अपने अपने छतों से विडियो बना थे। उन लोगों के कैमरे में उस समय की सारी गतिविधियां कैद हो गई। इस घटना का विडियो बना रहे शख्स की आवाज भी विडियो के साथ तेजी से वायरल हो गयी, जिसमे वो कहता है – पुलिस पगला गयी है क्या ?

स्वर्णिम इतिहास

बड़ी दुर्गा को कांधे पर नम आंखों से विदायी देते हैं लोग

मुंगेर के बड़ी दुर्गा मां का विसर्जन का अलग ही महत्व है। बड़ी दुर्गा मां 32 कहारों के कंधे पर सवार होकर विसर्जन के लिए मंदिर से निकलती हैं। बड़ी दुर्गा की प्रतिमा विजयादशमी के दिन शाम को मंदिर परिसर से बाहर विसर्जन के लिए निकलती है और अपने निर्धारित रूट से होते हुए शहर के विभिन्न मार्गो का भ्रमण करते हुए दूसरे दिन एकादशी को दोपहर लगभग 12 बजे तक सोझी घाट पहुंचती है। यहां श्रद्धालु गमगीन आंखों से मां को विदाई देते है। विसर्जन के जिस रास्ते से मां की शोभायात्रा निकलती है, उस रास्ते को शुद्ध जल से साफ किया जाता है। साथ ही पुष्पों की वर्षा भी की जाती है। श्रद्धालुओं के बीच मां को कंधा देने की होड़ लगी रहती है। जगह-जगह श्रद्धालुओं द्वारा मां की आरती उतारकर श्रद्धासुमन अर्पित किया जाता है। इस कारण बड़ी मां को दो किलोमीटर की विसर्जन यात्रा करने में लगभग 20 घंटा का समय लग जाता है। इससे पूर्व विजयादशमी की देर शाम लगभग 8 बजे मां अंबे चांैक पर बड़ी महारानी का भव्य स्वागत किया जाता है। वहां पर मां घंटाभर रूकती हैं। स्थनीय लोग पूर्व से उस जगह को शुद्ध जल से धोकर पूरे साज-सज्जा के साथ मां का स्वागत करते हैं। आरती उतारा जाता है। उसके बाद मां वहां से आगे की ओर बढ़ती है। मंदिर के पंडित प्रभाकांत मिश्रा बताते हैं कि एक बार यहां बिना कहार के सहारे विसर्जन के लिए प्रशासन ने ट्रॉली मंगाया था। लेकिन मां अपनी स्थान से टस से मस नहीं हुई। काफी प्रयास के बाद भी फिर से श्रद्धालुओं ने 32 कहार को बुलाया। उनके हाथ लगाते ही मां की प्रतिमा आसानी से बाहर निकल आयी। यही उनकी अपरम्पार महिमा को दर्शाता है।बड़ी माँ की मूर्ति की बेहद खास विशेषता है कोई भी मूर्तिकार इस प्रतिमा को बनाये, प्रत्येक वर्ष माँ का चेहरा एक ही तरह का बनता है. और चेहरे का भाव बदलता जाता। शुरुआत में सौम्य और सुन्दर प्रतीत होने वाली माता का चेहरा विजयादशमी तक आते आते रौद्र रूप में आ जाती है और फिर विजयादशमी के 9 बजे रात से मूर्ति के विसर्जन की तैयारी शुरू होती है। सभी जगह पर मूर्ति विसर्जन के लिए वाहन लाये जाते हैं मगर शादीपुर में बैठने वाली बड़ी महारानी, छोटी दुर्गा, बड़ी काली और छोटी काली की प्रतिमा को 32 कहारों के द्वारा कन्धा देकर विदाई दी जाती है। यहाँ मूर्ति विसर्जन नहीं बल्कि विदाई होती है। कंधे देने के लिए भीड़ टूटती है और विदाई के समय पुनः माँ का चेहरा बदलता है और बड़ी दुर्गा महारानी के साथ अन्य देवी तथा पूरे मुंगेरवासी का चेहरा गमगीन होता है.निर्धारित रूट पर शहर के मुख्य सड़क से मुंगेर किला के नजदीक से सोझी घाट में ग्यारहवीं दिन 11 बजे के आसपास विसर्जन हो जाता है. शहर के अम्बा चैक पर भव्य आरती होती है उसके बाद कौड़ा मैदान में बड़ी महारानी, छोटी दुर्गा, बड़ी काली छोटी काली, देवी माता का मिलन होता है. फिर आगे बेकापुर की दुर्गा माँ और फिर इससे आगे बाटा चैक पर स्थित दुर्गा माँ से मिलन होता है। इस वक्त का मौहोल में प्रेम की धारा बहती महसुस होती है और विशेष जगह पर भव्य आरती का आयोजन होता है।

और भड़क गई हिंसा

पुलिसिया कार्रवाई के बाद जब शहर का एक बेगुनाह छात्र पुलिस की गोली से मारा गया तब बिहार के मुंगेर में गुरुवार को फिर हिंसा भड़क गई। गुस्साई भीड़ ने बासुदेवपुर पुलिस चैकी में आग लगा दी। एसपी ऑफिस पर भी हमला हुआ। मुफस्सिल थाने में 6 गाड़ियों में आग लगा दी गई। इसके बाद चुनाव आयोग ने डीएम और एसपी को हटा दिया है। दरअसल, मूर्ति विसर्जन के दौरान फायरिंग में 26 अक्टूबर की रात एक की मौत हुई थी। जुलूस पर पुलिस ने बेरहमी से लाठीचार्ज किया था। इसका वीडियो 28 अक्टूबर को वायरल हुआ था। इसके बाद हिंसा भड़की। लोगों का यह गुस्सा एसपी लिपि सिंह को लेकर था, इसलिए स्थिति को काबू करने के लिए चुनाव आयोग ने मुंगेर एसपी के साथ डीएम राजेश मीणा को भी हटा दिया स्थिति को संभालने के लिए डीआईजी मनु महाराज खुद भारी संख्या में पुलिस बल के साथ उतर आए। शाम में मानवजीत सिंह ढिल्लों को एसपी और रचना पाटिल को मुंगेर डीएम के रूप में नियुक्त कर दिया गया। दोनों को जल्द से जल्द जॉइनिंग के आदेश दिए गए थे, ऐसे में ये अधिकारी हेलिकॉप्टर से मुंगेर पहुंचे, क्योंकि पटना से यहां पहुंचने में 4 घंटे से ज्यादा वक्त लग जाता। डीएम का मुंगेर में रहना जरूरी है, क्योंकि वे अभी निर्वाचन अधिकारी की भूमिका में हैं

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