Sat. Feb 27th, 2021


कोलकत्ता । पश्चिम बंगाल में अगले साल होने जा रहे विधानसभा चुनाव को लेकर मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो ममता बनर्जी जोर-शोर से तैयारियां कर रही हैं लेकिन उससे पहले ही ममता को एक के बाद एक कई बुरी खबरें मिल रही हैं। भी ममता बनर्जी और उनकी पार्टी को तीन झटके लगे। पहले तो पार्टी के दो नेताओं ने इस्तीफा दिया और फिर बीजेपी नेताओं पर पश्चिम बंगाल सरकार और पुलिस को कार्रवाई से रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में बीजेपी नेताओं के खिलाफ दर्ज मामलों को लेकर यह नोटिस जारी किया कि अगले आदेश तक पश्चिम बंगाल पुलिस उनपर कोई ऐक्शन नहीं ले सकती। इससे पहले बैरकपुर से पार्टी के विधायक शीलभद्र दत्ता ने इस्तीफा दिया था और फिर तृणमूल नेता कबीर उल इस्लाम ने पार्टी के अल्पसंख्यक सेल के महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया। सुप्रीम कोर्ट ने बीजेपी नेताओं के खिलाफ पश्चिम बंगाल में दायर आपराधिक मामलों को लेकर अगली सुनवाई तक किसी भी कार्रवाई पर रोक लगा दी है। यानी जब तक अगली सुनवाई नहीं होगी तब तक ममता के राज्य की पुलिस बीजेपी नेताओं पर कार्रवाई नहीं कर सकती। जिन नेताओं पर पश्चिम बंगाल में एफआईआर दर्ज किए गए हैं उनमें बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मुकुल रॉय, बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय, बीजेपी सांसद अर्जुन सिंह, सौरव सिंह, पवन कुमार सिंह और कबीर शंकर बोस शामिल हैं। इस हफ्ते के 5 दिन बीते हैं और तृणमूल कांग्रेस में अभी तक 5 नेताओं का इस्तीफा भी हो चुका है। बुधवार को दिग्गज नेता शुभेंदु अधिकारी ने पार्टी का साथ छोड़ा। इसके बाद गुरुवार को आसनसोल से टीएमसी विधायक जितेंद्र तिवारी और साउथ बंगाल स्टेट ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन अध्यक्ष दीप्तांगशु चौधरी ने भी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को अपना इस्तीफा सौंप दिया इस्तीफा दिया था। अब शुक्रवार को पार्टी से शीलभद्र दत्ता और कबीर उल इस्लाम ने भी इस्तीफा दे दिया है। बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष और गृह अमित शाह 19 और 20 दिसंबर को दो दिन के लिए बंगाल आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि इस दौरान ममता के कई बागी बीजेपी का दामन थाम सकते हैं। ममता बनर्जी को सत्ता तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाने वाले शुभेंदु अधिकारी भी अब कमल थामने जा रहे हैं। शुभेंदु अधिकारी के पिता शिशिर अधिकारी और भाई दिब्येंदु तृणमूल कांग्रेस के क्रमश: तामलुक और कांटी लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से सदस्य हैं और माना जाता है कि अधिकारी परिवार का पश्चिम मिदनापुर, बांकुड़ा, पुरुलिया, झारग्राम और बीरभूम के कुछ हिस्सों में प्रभाव है और वे 40 से 45 विधानसभा सीटों के नतीजों को प्रभावित कर सकते हैं।

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