Tue. Feb 23rd, 2021

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार ने कहा है कि कृषि कानूनों पर गतिरोध खत्म करने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति में ”पूरी तरह स्वतंत्र” व्यक्तियों को नियुक्त किया जाना चाहिए था। पूर्व केन्द्रीय मंत्री पवार ने पत्रकारों से कहा कि आंदोलनकारी किसानों को समिति पर विश्वास नहीं है क्योंकि यह कहा गया है कि इसके सदस्य पहले केन्द्र के नए कृषि कानूनों का समर्थन कर चुके हैं।


उन्होंने कहा, ”इसी कारण किसानों को नहीं लगता कि समिति से चर्चा करके कोई हल निकलेगा। मैं उनसे सहमत हूं। यदि स्वतंत्र (वास्तविक रूप से स्वतंत्र) व्यक्तियों को नियुक्त किया जाता, तो बेहतर होता।” पवार ने मंगलवार को कृषि कानूनों के कार्यान्वयन पर रोक लगाने और समिति गठित करने के सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का स्वागत किया था।


समिति में भारतीय किसान यूनियन, अखिल भारतीय किसान समन्वय समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष भूपिन्दर सिंह मान, अंतरराष्ट्रीय खाद्य नीति एवं अनुसंधान संस्थान के दक्षिण एशिया के निदेशक डॉ प्रमोद कुमार जोशी, कृषि अर्थशास्त्री तथा कृषि उत्पाद लागत एवं मूल्य आयोग के पूर्व अध्यक्ष अशोक गुलाटी और शेतकरी संगठन के अध्यक्ष अनिल घनवट को शामिल किया गया है। हालांकि गुरुवार को मान ने कहा कि वह किसान यूनियनों की भावनाओं और चिंताओं के मद्देनजर खुद को समिति से अलग कर रहे हैं। नए कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे किसानों के बीच गतिरोध खत्म करने के लिये सुप्रीम कोर्ट ने चार सदस्यीय समिति का गठन किया था।

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